Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 100 शब्दों में उत्तर दीजिए :

सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ लेखक ने किस आधार पर कहा है ? वर्तमान समय में जल संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

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मुअनजो-दड़ो के कुओं, महाकुंड और ढकी नालियों की व्यवस्था याद कीजिए। फिर आज के जल-संकट से जोड़िए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न के दो भाग पहचानें:
पहला भाग पाठ पर आधारित है कि लेखक ने सिंधु सभ्यता को जल-संस्कृति क्यों कहा।
दूसरा भाग आज के जीवन से जुड़ा है कि जल संरक्षण क्यों ज़रूरी है।
उत्तर लगभग 100 शब्दों में दोनों भागों को जोड़कर लिखना है।

चरण 2: पाठ से प्रमाण:
ओम थानवी बताते हैं कि मुअनजो-दड़ो के लोग पानी का महत्त्व भली-भाँति जानते थे।
वहाँ सैकड़ों कुएँ व्यवस्थित ढंग से बनाए गए थे।
महाकुंड इस बात का प्रमाण है कि स्नान और जल का सामाजिक-धार्मिक महत्त्व था।
पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों की ढकी नालियाँ बनी थीं, जो आज के कई शहरों से भी बेहतर लगती हैं।
जल को केंद्र में रखकर बनी इस जीवन-व्यवस्था के कारण इसे जल-संस्कृति कहना उचित है।

चरण 3: आज के संदर्भ में:
आज हम पानी को व्यर्थ बहाते हैं, जबकि कई क्षेत्र सूखे और जल-संकट से जूझ रहे हैं।
तालाब, कुएँ और बावड़ियाँ सूख रही हैं, भू-जल का अंधाधुंध दोहन हो रहा है।
यदि अभी जल नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट झेलना पड़ेगा।
इसलिए वर्षा-जल को सहेजना, नल खुला न छोड़ना और नदियों को स्वच्छ रखना हम सबका कर्तव्य है।

अंतिम उत्तर:
जल-केंद्रित नगर-व्यवस्था (कुएँ, महाकुंड, निकासी-नालियाँ) के आधार पर यह जल-संस्कृति थी; आज जल-संकट से बचने और जीवन को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है।
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