Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े नगर मुअनजो-दड़ो की नगर-योजना की तुलना आज के नगरों से किस प्रकार की है ? ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर विवेचना कीजिए।

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ग्रिड प्लान, तैंतीस फुट चौड़ी मुख्य सड़क, गलियों में खुलते दरवाज़े, ढकी नालियाँ और चंडीगढ़ (कार्बूजिए) से तुलना का उल्लेख कीजिए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ याद करना:
‘अतीत में दबे पाँव’ ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें लेखक सिंधु घाटी सभ्यता के नगर मुअनजो-दड़ो के खंडहर देखता है। बड़े चबूतरे से नीचे देखकर ही नगर का विस्तार समझ आ जाता है। यह तीन में से किन्हीं दो में चुना जाने वाला प्रश्न है, उत्तर लगभग 100 शब्दों का है।

चरण 2: पहले समानता, फिर अंतर:
समानता: मुअनजो-दड़ो की सड़कें आड़ी-सीधी रेखाओं में हैं, जैसे आज के ‘ग्रिड’ शैली के शहर चंडीगढ़, इस्लामाबाद और ब्रासीलिया। चंडीगढ़ में भी, मुअनजो-दड़ो की तरह, कोई घर मुख्य सड़क पर नहीं खुलता; पहले सेक्टर में, फिर गली में और फिर घर में जाना पड़ता है।
अंतर: लेखक के अनुसार आज की सेक्टर-मार्का कॉलोनियाँ रहन-सहन को नीरस बनाती हैं और आधुनिक ग्रिड शहर अपने आप विकसित होने का कितना अवकाश छोड़ते हैं, इस पर शंका है। आज शहरों में नियोजन के नाम पर अराजकता अधिक है।

चरण 3: लगभग 100 शब्दों में आदर्श उत्तर:
मुअनजो-दड़ो हजारों वर्ष पहले बसा था, फिर भी उसकी योजना आधुनिक लगती है। उसकी सड़कें ग्रिड शैली में थीं, मुख्य सड़क तैंतीस फुट चौड़ी थी और घरों के दरवाज़े भीतर की गलियों में खुलते थे। ढकी नालियाँ, हर घर में स्नानघर और सैकड़ों कुएँ स्वास्थ्य और पानी की अच्छी व्यवस्था बताते हैं। लेखक कहता है कि चंडीगढ़ में कार्बूजिए ने भी यही शैली अपनाई, मानो उसने यह सीख मुअनजो-दड़ो से ली हो। दूसरी ओर आज की सेक्टर-मार्का कॉलोनियाँ जीवन को नीरस बनाती हैं और कई शहरों में नियोजन के नाम पर अव्यवस्था है।

अंतिम उत्तर:
मुअनजो-दड़ो की नगर-योजना आज के ग्रिड शहरों, विशेषकर चंडीगढ़, जैसी है, पर लेखक की दृष्टि में वह आज के नीरस और अव्यवस्थित नियोजन से कहीं बेहतर मिसाल है।
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