Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

“ ‘जूझ’ कहानी लेखक के जीवन-संघर्ष की प्रेरक गाथा है।” इस गाथा के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालिए।

Show Hint

पिता का विरोध, माँ और दत्ता जी राव की मदद, खेती के काम की शर्त, चव्हाण का उपहास, वसंत पाटील से मित्रता और सौंदलगेकर मास्टर से कविता की प्रेरणा क्रम से लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

चरण 1: शीर्षक से शुरुआत:
‘जूझ’ का अर्थ है कठिनाइयों से लड़ना। आनंद यादव (वितान भाग-2) के इस पाठ में लेखक का जीवन लगातार एक के बाद एक बाधा से जूझने की कहानी है। हम इसे संघर्ष के प्रकारों में बाँटकर देखेंगे।

चरण 2: पारिवारिक संघर्ष:
पिता का मानना था कि पढ़ाई से कुछ नहीं होगा, खेत का काम ज़रूरी है। लेखक की पढ़ने की ललक बनी रही। उसने माँ को साथ लिया और दत्ता जी राव ने पिता को समझाकर, डाँटकर उसे पाठशाला भेजने के लिए राज़ी किया। शर्त यह थी कि खेत का काम भी चलता रहेगा।

चरण 3: सामाजिक और भीतरी संघर्ष:
पाठशाला में पहले ही दिन चव्हाण ने उसका गमछा लेकर मज़ाक बनाया, पर वह डटा रहा।
उसने वसंत पाटील को देखकर पढ़ाई में मेहनत की और उसका दोस्त बना।
मराठी पढ़ाने वाले सौंदलगेकर मास्टर के कविता-पाठ से उसमें कविता की रुचि जगी। ढोर चराते हुए वह तुकबंदी करता और मास्टर को दिखाता।

चरण 4: संक्षिप्त उत्तर (लगभग 100 शब्द):
यह कथन सही है। लेखक को घर से पढ़ाई का साथ नहीं मिला, फिर भी उसने माँ और दत्ता जी राव की मदद से स्कूल जाने का रास्ता निकाला और खेती का काम भी किया। स्कूल में उपहास और पिछड़ने का डर था, पर उसने मेहनत से अपनी जगह बनाई। सौंदलगेकर मास्टर ने उसकी तुकबंदी को सुधारकर उसे कविता की ओर मोड़ा। उसका यह संघर्ष हर विद्यार्थी को कठिनाइयों से न डरने की प्रेरणा देता है।

अंतिम उत्तर:
घर, विद्यालय और मन, तीनों मोर्चों पर जूझकर लेखक ने शिक्षा और काव्य-रुचि पाई, इसलिए यह पाठ प्रेरक गाथा है।
Was this answer helpful?
0

Top Questions on जूझ