Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर शीर्षक का औचित्य सिद्ध कीजिए।

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धरती में दबी सिंधु सभ्यता और खंडहरों में पाँव आहिस्ता उठाकर चलते लेखक के अनुभव, दोनों अर्थों से शीर्षक की सार्थकता बताइए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: शीर्षक की कसौटियाँ:
अच्छा शीर्षक विषय-वस्तु का सूचक, संक्षिप्त, जिज्ञासा जगाने वाला और भाव प्रकट करने वाला होता है। इन्हीं कसौटियों पर ओम थानवी के पाठ ‘अतीत में दबे पाँव’ (वितान, भाग 2) का शीर्षक परखते हैं।

चरण 2: विषय-वस्तु और संक्षिप्तता:
पाठ मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा के खंडहरों के माध्यम से सिंधु सभ्यता के अतीत का वर्णन करता है। ‘अतीत’ शब्द सीधे इसी विषय की ओर इशारा करता है और शीर्षक छोटा भी है।

चरण 3: जिज्ञासा और भाव:
‘दबे पाँव’ पढ़कर पाठक सोचता है कि कौन, कहाँ दबे पाँव जा रहा है। पाठ में उत्तर मिलता है – लेखक और उसके साथी खंडहरों में पाँव आहिस्ता उठाकर, एक घर से दूसरे घर में बेहद धीमी गति से जाते हैं, मानो किसी अजनबी घर में अनधिकार प्रवेश कर रहे हों।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
यह शीर्षक प्रतीकात्मक और सटीक है। ‘अतीत’ उस सभ्यता की ओर संकेत करता है जो सदियों तक टीलों के नीचे दबी रही। ‘दबे पाँव’ लेखक की उस मनःस्थिति को बताता है जिसमें वह सूनी गलियों और घरों में धीरे-धीरे, संकोच के साथ चलता है। उसे लगता है कि देहरी पर पाँव रखते ही कोई सहमा देगा, जैसे वहाँ अब भी जीवन बसा हो। इस प्रकार शीर्षक विषय और लेखक की संवेदना, दोनों को व्यक्त करता है और जिज्ञासा भी जगाता है।

अंतिम उत्तर:
शीर्षक विषय का सूचक, संक्षिप्त, जिज्ञासापूर्ण और भावपूर्ण है, इसलिए उसका औचित्य सिद्ध होता है।
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