Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘जूझ’ के कथानायक का मन खेती के काम की अपेक्षा पाठशाला जाने के लिए क्यों व्याकुल था ?

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‘जन्म-भर खेत में काम करने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा’ और ‘पढ़ जाऊँगा तो नौकरी लग जाएगी’ – इन दोनों विचारों के आधार पर उत्तर लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का केंद्र:
प्रश्न पूछता है कि खेती की तुलना में पाठशाला उसे क्यों खींचती थी। इसका उत्तर कथानायक के अपने विचारों में मिलता है, जो ‘जूझ’ (आनंद यादव, वितान भाग 2) के आरंभ में दिए गए हैं।

चरण 2: खेती का अनुभव:
खेत का काम कठिन था – दीवाली के बाद महीना-भर ईख पेरने का कोल्हू चलाना, खेतों में पानी लगाना। दत्ता जी राव से उसने कहा कि दादा ने पढ़ाई मना कर दी है क्योंकि खेतों में पानी लगाने वाला कोई नहीं है। इस मेहनत से परिवार की दशा सुधरती नहीं दिखती थी।

चरण 3: पढ़ाई का सपना:
उसे लगता था कि पढ़ाई ही इस हालत से निकलने का रास्ता है। पढ़कर नौकरी मिलेगी, हाथ में पैसे रहेंगे और विठोबा आण्णा जैसा कोई कारोबार भी हो सकेगा।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
‘जूझ’ का कथानायक खेती को भविष्यहीन मानता था। उसका विश्वास था कि जन्म-भर खेत में खटकर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा, क्योंकि बाबा के समय जो था वह दादा के समय नहीं रहा। दादा खुद काम से जी चुराता था और बेटे को पढ़ाई छुड़ाकर खेत में लगा रखा था। कथानायक के मन में यह आशा थी कि पढ़-लिखकर वह नौकरी पा सकेगा या कोई धंधा कर सकेगा। इसलिए दादा के डर से कुछ न कह पाने पर भी उसका मन पाठशाला जाने के लिए तड़पता रहता था।

अंतिम उत्तर:
खेती में कोई भविष्य न दिखना और शिक्षा से नौकरी व बेहतर जीवन की आशा – यही उसकी व्याकुलता के कारण थे।
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