Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘यशोधर बाबू का व्यक्तित्व किशनदा की प्रतिच्छाया है’ इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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यशोधर बाबू किशनदा के फ़िकरे, आदतें और परंपराएँ निभाते हैं, पर किशनदा कुँआरे थे और यशोधर बाबू गृहस्थ हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: ‘प्रतिच्छाया’ का अर्थ:
प्रतिच्छाया का अर्थ है परछाईं। प्रश्न पूछता है कि क्या यशोधर बाबू का व्यक्तित्व किशनदा की परछाईं है। इसके लिए दोनों के व्यवहार, आदतों और जीवन की तुलना करनी होगी।

चरण 2: पाठ से प्रमाण:
कहानी कहती है कि यशोधर बाबू तमाम बातें ‘किशनदा के शब्दों में और उनके ही लहजे में’ कहते हैं। किशनदा के जाने के बाद उन्होंने ही उनकी परंपराओं को जीवित रखने की कोशिश की और इसमें पत्नी-बच्चों को नाराज़ किया। अंत में बेटे का दिया ड्रेसिंग गाउन पहनकर भी उन्हें लगता है कि उनके अंगों में वही किशनदा उतर आया है।

चरण 3: आदर्श उत्तर:
मेरे विचार से यह कथन अधिकांशतः सही है। यशोधर बाबू ने किशनदा को अपना आदर्श बनाया है – दफ़्तर में मातहतों से थोड़ा हँसी-मज़ाक कर चल देना, सुबह जल्दी उठना, धोती-कुर्ता को अपनी पोशाक मानना और सरकारी क्वार्टर में रहकर मकान न बनाना, ये सब किशनदा की देन हैं। परंतु किशनदा अविवाहित थे, जबकि यशोधर बाबू पत्नी-बच्चों के बीच रहकर पुराने और नए मूल्यों के टकराव से जूझते हैं। वे कभी सोचते भी हैं कि किशनदा की तरह घर-गृहस्थी न पालना शायद बेहतर होता। इसलिए वे पूरी तरह नकल नहीं हैं।

अंतिम उत्तर:
यशोधर बाबू पर किशनदा की गहरी छाप है, पर पारिवारिक द्वंद्व उन्हें अलग व्यक्तित्व भी देता है।
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