Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

लेखक ने ‘अतीत में दबे पाँव’ शीर्षक ही क्यों चुना ? इस पाठ से उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए।

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शीर्षक के दो भाव लिखिए: धरती में दबा मुअनजो-दड़ो और खंडहरों में आहिस्ता, अपराध-बोध के साथ दबे पाँव चलना। देहरी पर सहमना, रसोई की गंध और बैलगाड़ी की रुन-झुन के उदाहरण दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: शीर्षक के दो अर्थ:
शीर्षक में दो भाव छिपे हैं: एक, अतीत जो धरती में दबा था; दो, लेखक का दबे पाँव, यानी चुपचाप और आहिस्ता चलना। उत्तर में दोनों को पाठ के उदाहरणों से जोड़ना है।

चरण 2: पहला भाव, दबा हुआ अतीत:
मुअनजो-दड़ो, जिसका अर्थ है मुर्दों का टीला, टीलों के नीचे सदियों तक दबा रहा। 1922 में राखालदास बनर्जी स्तूप की खोज करने आए और खुदाई में सिंधु घाटी सभ्यता के निशान मिले। पर यह शहर आज भी वहीं है और उसकी किसी भी दीवार से पीठ टिकाकर सुस्ताया जा सकता है।

चरण 3: दूसरा भाव, दबे पाँव चलना:
लेखक कहता है कि यहाँ एक घर से दूसरे घर में जाने के लिए बाहर नहीं आना पड़ता, क्योंकि सब खंडहर खुले हैं। फिर भी हर कोई पाँव आहिस्ता उठाते हुए धीमी गति से घरों में दाखिल होता था, जैसे किसी पराए घर में चोरी-छिपे घुस आया हो। यह अहसास हर समय रहता है कि कल कोई यहाँ बसता था; सभ्यता हमारी परंपरा है, मगर घर हमारा नहीं।

चरण 4: एक और उदाहरण:
किसी आँगन की टूटी सीढ़ियाँ अब कहीं नहीं ले जातीं, पर उन पर खड़े होकर लगता है कि आप इतिहास के पार झाँक रहे हैं। देहरी पर सहम जाना, रसोई की गंध और बैलगाड़ी की रुन-झुन भी अतीत की इसी मौन उपस्थिति को बताते हैं।

चरण 5: संक्षिप्त उत्तर (लगभग 100 शब्द):
शीर्षक एक साथ नगर के धरती में दबे इतिहास और लेखक के सहमे, आहिस्ता कदमों को व्यक्त करता है। खंडहरों में चलते हुए लेखक और उसके साथी किसी पराए घर में अनधिकार प्रवेश के अपराध-बोध से धीरे-धीरे चलते हैं। देहरी, रसोई, सीढ़ियाँ और सुनसान गलियाँ अतीत को जीवित कर देती हैं।

अंतिम उत्तर:
मुअनजो-दड़ो के दबे हुए इतिहास और उसमें दबे पाँव चलने के अनुभव के कारण शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त है।
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