Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

“मैं अपनी आँखों और कानों में प्राणों की सारी शक्ति लगा कर – दम रोककर मास्टर के हाव-भाव, ध्वनि, गति, चाल और रस पीता रहता।” ‘जूझ’ कहानी के इस कथन को स्पष्ट करते हुए लिखिए कि एक अध्यापक कैसे अपने छात्रों का आदर्श-स्वरूप हो सकता है ?

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पहले कथन से लेखक की एकाग्रता और मास्टर की शैली का प्रभाव बताइए, फिर आदर्श अध्यापक के गुण लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न की दो माँगें:
पहले दिए गए कथन को ‘जूझ’ कहानी के संदर्भ में स्पष्ट करना है, फिर यह बताना है कि अध्यापक कैसे छात्रों का आदर्श बन सकता है।

चरण 2: कथन की व्याख्या:
‘आँखों और कानों में प्राणों की शक्ति लगाना’ अत्यंत एकाग्रता और लगन का सूचक है। ‘रस पीना’ बताता है कि लेखक कविता के आनंद में डूब जाता था। यह तभी होता है जब पढ़ाने वाला स्वयं रस में डूबकर पढ़ाए।

चरण 3: अध्यापक का आदर्श रूप:
आदर्श अध्यापक छात्र की झिझक और हीनता दूर करता है, उसकी प्रतिभा पहचानता है और उसे आगे बढ़ने का हौसला देता है। वह अपने आचरण और शैली से भी छात्रों को सिखाता है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 100 शब्द):
लेखक का यह कथन उसकी गहरी एकाग्रता और अपने अध्यापक के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है। मास्टर जब कविता पढ़ाते थे तो उनके सुर, अभिनय और भावों से कविता जीवंत हो उठती थी। इसलिए लेखक को पढ़ाई में आनंद आने लगा। जो अध्यापक विषय को प्रेम से पढ़ाता है, छात्रों की प्रतिभा पहचानता है और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देता है, वही उनका आदर्श बनता है। ऐसे शिक्षक के प्रभाव से छात्र के जीवन की दिशा बदल जाती है।

अंतिम उत्तर:
रुचिकर शिक्षण और प्रोत्साहन देने वाला अध्यापक छात्रों के लिए आदर्श स्वरूप होता है।
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