Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘जूझ’ कहानी में बाल मनोविज्ञान का बड़ा ही सूक्ष्म वर्णन हुआ है। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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पढ़ने की ललक, दादा का डर, दत्ता जी राव वाली युक्ति, कक्षा में अपमान, वसंत पाटील से होड़ व मित्रता और सौंदलगेकर मास्टर की प्रेरणा के उदाहरण दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आधार:
‘जूझ’ में लेखक ने अपने बचपन की कथा स्वयं कही है, इसलिए किशोर मन की हर हलचल सीधे सामने आती है। नीचे के उदाहरण दिखाते हैं कि बच्चे का मन किन भावों से गुज़रता है।

चरण 2: उदाहरण 1, सपना और भीतर का संघर्ष:
आनंदा सोचता है कि जन्म भर खेत में काम करने से कुछ हाथ नहीं लगेगा, पढ़ लेगा तो नौकरी लग जाएगी। यह सपना वह मन ही मन पालता है, पर पिता से कहने का साहस नहीं जुटा पाता। दत्ता जी राव के सामने वह कुछ झूठ-सच मिलाकर अपनी बात रखता है, यह भी बाल-मन की स्वाभाविक युक्ति है।

चरण 3: उदाहरण 2, अपमान का डर:
पहले दिन कक्षा में उसकी पोशाक अजीब लगती है, शरारती लड़का गमछा छीनता है और पहले ही दिन इस घटना से उसकी छाती धक-धक करने लगती है। अपनी ही पाठशाला उसे पराई लगने लगती है। यह किशोर के आत्मसम्मान और संकोच का सजीव चित्र है।

चरण 4: उदाहरण 3, आत्मविश्वास का जागना:
वसंत पाटील की तरह किताबों पर कवर चढ़ाना, बस्ता ठीक रखना और सवाल जाँचना उसके अनुकरण-भाव को दिखाता है। ‘आनंदा’ कहकर पुकारे जाने पर उसे पहली बार अपनापन मिलता है। सौंदलगेकर मास्टर की कविताओं से प्रभावित होकर वह अकेले में ऊँची आवाज़ में कविता गाता, अभिनय करता और नाचता है; उसे लगता है कि उसके नए पंख निकल आए हैं।

अंतिम उत्तर:
इन प्रसंगों से सिद्ध होता है कि ‘जूझ’ में बच्चे की इच्छा, भय, संकोच, अनुकरण, होड़ और उत्साह का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है।
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