Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता की जल व्यवस्था का वर्णन करते हुए स्पष्ट कीजिए कि वर्तमान में जल-संरक्षण की आवश्यकता क्यों हो गई है ?

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कुएँ, महाकुंड और ढकी नालियों का वर्णन कीजिए, फिर घटते भूजल और प्रदूषण के कारण संरक्षण की ज़रूरत बताइए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को क्रम से बाँटना:
हम पहले जल के स्रोत देखेंगे, फिर जल के उपयोग और निकासी को देखेंगे, और अंत में आज की स्थिति से तुलना करके संरक्षण की आवश्यकता बताएँगे। यह प्रश्न तीन में से किन्हीं दो में आने वाला है।

चरण 2: स्रोत और उपयोग:
मुअनजो-दड़ो में सिंधु नदी पास थी, फिर भी लोगों ने बड़ी संख्या में कुएँ खोदे। लेखक के अनुसार इनकी संख्या सैकड़ों में थी। ये पक्की ईंटों से बने थे। नगर के बीच बना महाकुंड धार्मिक या सामूहिक स्नान के काम आता था। उसकी बनावट इतनी मज़बूत थी कि पानी रिसता नहीं था।

चरण 3: निकासी की व्यवस्था:
सड़कों के किनारे बनी नालियाँ ऊपर से ढकी थीं और घरों की नालियाँ उनसे जुड़ी थीं। इससे गंदगी फैलने नहीं पाती थी और नगर साफ़ रहता था। यह व्यवस्था बताती है कि वहाँ के लोग पानी का महत्त्व समझते थे।

चरण 4: आज की आवश्यकता:
आज बेहिसाब दोहन से भूजल नीचे जा रहा है। बारिश का पानी बहकर बेकार चला जाता है। कारखानों का कचरा नदियों को गंदा कर रहा है। यदि हम अभी पानी नहीं बचाएँगे तो आगे की पीढ़ियों के लिए संकट होगा। इसलिए जल-संरक्षण आज की ज़रूरत बन गया है।

चरण 5: लगभग 100 शब्दों में आदर्श उत्तर:
लेखक के वर्णन से पता चलता है कि सिंधु घाटी के लोग जल-प्रबंधन में बहुत कुशल थे। उन्होंने पक्की ईंटों के सैकड़ों कुएँ बनाए। महाकुंड को पानी रोकने के लिए गारे से मज़बूत किया गया। घरों के स्नानघरों का पानी ढकी नालियों से बाहर जाता था। आज के समय में जनसंख्या, उद्योग और प्रदूषण के कारण जल घट रहा है। इसलिए वर्षा-जल संचयन, कम उपयोग और जल-स्रोतों की सफ़ाई ज़रूरी हो गई है।

अंतिम उत्तर:
सिंधु घाटी सभ्यता में जल का संग्रह और निकासी सुव्यवस्थित थी। आज जल के संकट के कारण जल-संरक्षण अनिवार्य हो गया है।
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