Question:hard

‘सपनों के से दिन’ पाठ में लेखक और उन जैसे परिवारों की अपने बच्चों को पढ़वाने में अरुचि के क्या कारण रहे होंगे? क्या वर्तमान में भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर समान दृष्टिकोण है? अपने विचार के पक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।

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उत्तर को दो भागों में बाँटिए, पहले उस समय के कारण जैसे गरीबी और मास्टर की पिटाई, फिर आज की बदली स्थिति, और अंत में अपना मत कारण सहित लिखिए।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • ऐसे प्रश्न में उत्तर को दो कालखंडों में बाँटकर लिखना चाहिए, पहले तब और फिर अब।
  • अंत में स्पष्ट मत और उसका कारण देना आवश्यक है, तभी उत्तर तर्कपूर्ण कहलाएगा।

Step 1: उस समय की सोच को समझिए।
उन परिवारों के लिए सबसे बड़ा प्रश्न रोज की रोटी का था। जो बच्चा खेत में हाथ बँटा सकता था, उसे स्कूल भेजना उन्हें घाटे का सौदा लगता था।
शिक्षा का फल वर्षों बाद मिलता है, और इतनी लंबी प्रतीक्षा करने की स्थिति उनके पास नहीं थी।

Step 2: स्कूल की ओर से भी कारण देखिए।
पाठ में मास्टर प्रीतमचंद की कठोर पिटाई का वर्णन है, जिससे बच्चे डरकर स्कूल से भागते थे। साथ ही किताबों और कपड़ों का खर्च भी भारी पड़ता था।
अर्थात न घर से प्रेरणा थी और न स्कूल से आकर्षण।

Step 3: अब आज की स्थिति से तुलना कीजिए।
आज नौकरी और उन्नति दोनों शिक्षा से जुड़ गई हैं, इसलिए माता-पिता स्वयं बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। शिक्षा का अधिकार कानून, मुफ्त पुस्तकें, मध्याह्न भोजन और छात्रवृत्तियों ने आर्थिक बाधा घटाई है।
शारीरिक दंड पर रोक से स्कूल का भय भी कम हुआ है।

Step 4: अपना मत तर्क के साथ रखिए।
मेरे विचार से दृष्टिकोण बहुत बदला है, क्योंकि आज शिक्षा को बोझ नहीं, अवसर माना जाता है। पर यह परिवर्तन सब जगह समान नहीं है।
जहाँ आज भी अत्यधिक गरीबी है, वहाँ बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़कर काम पर लग जाते हैं।

Final Answer: उस समय की अरुचि के पीछे आर्थिक तंगी, शिक्षा से तुरंत लाभ न दिखना और स्कूल का कठोर वातावरण था। आज सोच काफी बदल चुकी है क्योंकि शिक्षा उन्नति का साधन बन गई है और सरकारी सुविधाएँ भी मिलती हैं, फिर भी गरीबी वाले क्षेत्रों में यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
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