Concept:
- कबीर की साखियाँ प्रायः विरोधी जोड़ों में बात कहती हैं, जैसे अँधेरा और दीपक, मैं और हरि।
- इन जोड़ों को पकड़ लेने पर उत्तर अपने आप निकल आता है।
Step 1: कबीर का विरोधी जोड़ा पहचानिए।
कबीर कहते हैं कि जब ‘मैं’ था तब हरि नहीं, अब हरि हैं तो ‘मैं’ नहीं। यह अहंकार और ईश्वर का जोड़ा है।
दोनों में से एक ही रह सकता है।
Step 2: इसी से बाधा का नाम निकालिए।
चूँकि ‘मैं’ के रहते हरि नहीं आते, इसलिए सबसे बड़ी बाधा वही ‘मैं’ है, अर्थात अहंकार।
Step 3: दूसरे जोड़े से कारण समझिए।
कबीर दीपक और अँधेरे का उदाहरण देते हैं। जैसे ही दीपक जलता है, अँधेरा टिक नहीं पाता। वैसे ही ज्ञान और भक्ति का प्रकाश आते ही अहंकार समाप्त हो जाता है।
अर्थात अहंकार का बने रहना यही सिद्ध करता है कि भक्ति का प्रकाश अभी आया ही नहीं।
Step 4: व्यावहारिक कारण जोड़िए।
अहंकारी व्यक्ति स्वयं को सबसे ऊपर मानता है, इसलिए वह न सीखता है, न झुकता है, न प्रेम करता है। भक्ति तो पूरी तरह झुक जाने का नाम है, इसलिए अहंकार उसका सबसे बड़ा शत्रु है।
Final Answer: कबीर के अनुसार सबसे बड़ी बाधा अहंकार है, क्योंकि ‘मैं’ और ‘हरि’ एक साथ नहीं रह सकते। जैसे दीपक जलते ही अँधेरा मिट जाता है, वैसे ही भक्ति का प्रकाश आते ही अहंकार मिटना आवश्यक है, तभी प्रभु की प्राप्ति होती है।