Comprehension

जीवन के लिए जागना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी सोना है। दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे के सहारे पर हैं। नींद का न आना भी एक विकार है, जिससे अनेक प्रकार की बाधाएँ आ सकती हैं और जो प्राणी रात-दिन सोता ही रहे, वह तो निष्क्रिय ही है। यदि दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की सहायता करती रहें – आदमी जागे कर्म करने के लिए, सोये विश्राम के लिए – तो जीवन सुखी होता है, लेकिन जागना जीवन का मुख्य लक्षण है, सोना अर्थात् – विश्राम, तो केवल उसका सहायक है। इसलिए, जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है और निद्रा पतन तथा ह्रास का। जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है, निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है। कम-से-कम सोने के लिए अनेक उपाय और साधन बताए गए हैं। अधिक-से-अधिक सोने के लिए आज तक किसी ने कोई उपाय नहीं बताया – उसी तरह, जैसे स्वस्थ रहने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न किए जाते हैं, पर बीमारी के लिए भी किसी ने कोई प्रयत्न किया है, ऐसा कभी सुनने में नहीं आया। वास्तव में स्वास्थ्य का न होना ही बीमारी है – उसी तरह, जैसे प्रकाश का न होना ही अंधकार है। आदमी जितना ही कम सोये उतना ही जागरूक है, यहाँ तक कि कई विद्वानों का मत है, सोना कोई आवश्यक क्रिया नहीं। संभव है तपस्वियों के लिए सोना आवश्यक न हो, उनकी प्रकृति में रज और सत ही रह जाता हो, तम की सर्वथा हानि हो जाती हो, पर साधारण प्राणियों के लिए भी यही नियम लागू है कि मात्रा से अधिक सोने में हानि है, अतएव जब हम किसी राष्ट्र के विषय में जागृति की कामना करते हैं, तो इसका बोध यह होता है कि वह राष्ट्र मात्रा से अधिक तमोगुणी हो गया और उसमें जीवन की मात्रा ज़रूरत से कम है।

Question: 1

‘जागृति’ और ‘निद्रा’ किन गुणों से संबंधित हैं ?

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गद्यांश की पंक्ति देखिए : जागृति रजोगुण-प्रधान है और निद्रा में तमोगुण की प्रधानता है। इसलिए उत्तर रज और तम है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • सत और तम
  • रज और सत
  • सत और रज
  • रज और तम
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आशय:
हमें ‘जागृति’ और ‘निद्रा’ को क्रम से उनके गुणों से मिलाना है। इसलिए पहले जागृति का गुण और फिर निद्रा का गुण देखना होगा।

चरण 2: गद्यांश से प्रमाण:
गद्यांश कहता है कि जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है, अर्थात् वह कर्म और गतिशीलता से जुड़ी है। निद्रा में तमोगुण अधिक होता है, अर्थात् आलस्य और जड़ता की प्रधानता रहती है। इस प्रकार क्रम रज, फिर तम बनता है।

चरण 3: अशुद्ध विकल्पों को हटाना:
जिन विकल्पों में पहला गुण ‘सत’ है, यानी (1) और (3), वे जागृति के लिए ग़लत हैं। जिस विकल्प (2) में दूसरा गुण ‘सत’ है, वह निद्रा के लिए ग़लत है। केवल विकल्प (4) में दोनों गुण क्रम से सही हैं।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (4) रज और तम है।
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Question: 2

गद्यांश के अनुसार सोना अर्थात् निद्रा किसकी सहायक है ?

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गद्यांश की पंक्ति देखिए : ‘आदमी जागे कर्म करने के लिए, सोये विश्राम के लिए।’ नींद विश्राम दिलाती है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • स्वास्थ्य की
  • जागने की
  • विश्राम की
  • मृत्यु की
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आशय:
हमें देखना है कि गद्यांश के अनुसार नींद किस काम में मदद करती है। इसके लिए गद्यांश में जागने और सोने के उद्देश्य वाली पंक्ति खोजनी होगी।

चरण 2: गद्यांश से प्रमाण:
गद्यांश कहता है कि जागना और सोना दोनों एक-दूसरे के सहारे हैं : ‘आदमी जागे कर्म करने के लिए, सोये विश्राम के लिए।’ यानी जागने का उद्देश्य कर्म है और सोने का उद्देश्य विश्राम है। लेखक ने स्वयं ‘सोना अर्थात् – विश्राम’ लिखकर निद्रा और विश्राम को जोड़ा है। इसलिए निद्रा विश्राम की सहायक है।

चरण 3: अन्य विकल्पों को हटाना:
‘स्वास्थ्य’ और ‘मृत्यु’ का संबंध निद्रा के उद्देश्य से गद्यांश में नहीं जोड़ा गया। ‘जागने’ को गद्यांश मुख्य क्रिया कहता है, परंतु सोने के उद्देश्य के रूप में विश्राम का ही नाम लिया गया है। इस प्रकार विकल्प (3) ही उत्तर है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (3) विश्राम की है।
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Question: 3

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : जागना जीवन के लिए आवश्यक है।

कारण : जाग्रत हो ध्यानपूर्वक कर्म करने से ही, व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव है।

विकल्प :

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पहले कथन और कारण को अलग-अलग गद्यांश से जाँचिए। दोनों सही हैं और कारण यह बताता है कि जागना क्यों आवश्यक है, इसलिए विकल्प (3)।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: इस प्रकार के प्रश्न का नियम:
कथन-कारण प्रश्न में पहले दोनों वाक्यों को अलग-अलग जाँचा जाता है। फिर देखा जाता है कि कारण से कथन का ‘क्यों’ स्पष्ट होता है या नहीं।

चरण 2: अलग-अलग जाँच:
गद्यांश के आरंभ में कहा है कि जीवन के लिए जागना ज़रूरी है और आगे लिखा है कि जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है। अतः कथन सही है। आदमी कर्म करने के लिए जागता है, इसलिए कारण में लिखी बात भी गद्यांश की भावना के अनुकूल सही है।

चरण 3: कारण से कथन का स्पष्टीकरण:
यदि प्रश्न पूछा जाए कि जागना आवश्यक क्यों है, तो उत्तर होगा कि जाग्रत रहकर कर्म करने से ही उन्नति संभव है। यही बात कारण में कही गई है। इसलिए कारण, कथन की सही व्याख्या है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इस प्रकार वह विकल्प चुना जाएगा जिसमें दोनों सही हों और कारण कथन की व्याख्या करता हो।

अंतिम उत्तर:
सही उत्तर विकल्प (3) है।
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Question: 4

‘जागृति’ और ‘निद्रा’ किसके प्रतीक हैं ? गद्यांश के आधार पर बताइए।

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गद्यांश की पंक्ति ‘जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है और निद्रा पतन तथा ह्रास का’ देखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: गुणों के आधार पर विचार:
लेखक ने जागृति को रजोगुण-प्रधान क्रिया कहा है और निद्रा में तमोगुण की प्रधानता बताई है।
रजोगुण का संबंध गति, उद्यम और कर्म से है, जबकि तमोगुण का संबंध जड़ता, आलस्य और अंधकार से है।

चरण 2: जीवन से जोड़कर देखना:
गद्यांश के अनुसार जागना जीवन का मुख्य लक्षण है। जो व्यक्ति जागकर कर्म करता है, वही आगे बढ़ता है और उसका अभ्युदय होता है।
इसके विपरीत जो रात-दिन सोता ही रहे, वह निष्क्रिय है और उसका पतन निश्चित है।

चरण 3: पंक्ति से पुष्टि:
लेखक का स्पष्ट कथन है – “जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है और निद्रा पतन तथा ह्रास का।” इसी से उत्तर पक्का होता है।

अंतिम उत्तर:
‘जागृति’ जीवन और उन्नति की तथा ‘निद्रा’ पतन और ह्रास की प्रतीक है।
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Question: 5

‘जागना’ और ‘सोना’ दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक कैसे हैं ? स्पष्ट कीजिए।

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‘आदमी जागे कर्म करने के लिए, सोये विश्राम के लिए’ पंक्ति के आधार पर दोनों का संबंध लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: एक के बिना दूसरे की स्थिति:
यदि कोई केवल जागता रहे और सोए नहीं, तो उसका शरीर थक जाएगा और नींद का न आना एक विकार बनकर अनेक बाधाएँ पैदा करेगा।
यदि कोई केवल सोता रहे, तो वह निष्क्रिय हो जाएगा और जीवन का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगा।

चरण 2: दोनों के मेल का परिणाम:
गद्यांश में लिखा है कि यदि दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की सहायता करती रहें – आदमी जागे कर्म करने के लिए, सोये विश्राम के लिए – तो जीवन सुखी होता है।
अर्थात् कर्म और विश्राम का संतुलन ही सुख का आधार है।

चरण 3: मुख्य और सहायक का संबंध:
लेखक जागने को जीवन का मुख्य लक्षण और सोने को उसका सहायक मानता है। सहायक के बिना मुख्य क्रिया टिक नहीं सकती, इसीलिए दोनों पूरक हैं।

अंतिम उत्तर:
जागने से कर्म होता है और सोने से उस कर्म के लिए शक्ति मिलती है; एक के बिना दूसरा अधूरा है, इसलिए दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं।
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Question: 6

लेखक के अनुसार ‘किसी राष्ट्र की जागृति’ का क्या तात्पर्य है ? उल्लेख कीजिए।

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अंतिम वाक्य में ‘तमोगुणी’ और ‘जीवन की मात्रा ज़रूरत से कम’ के भाव पर ध्यान दीजिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: व्यक्ति से राष्ट्र की ओर:
लेखक ने पहले बताया है कि व्यक्ति के जीवन में जागृति उन्नति का चिह्न और निद्रा पतन का चिह्न है। यही बात वह पूरे राष्ट्र पर लागू करता है।

चरण 2: राष्ट्र की स्थिति:
जिस राष्ट्र में लोग निष्क्रिय, आलसी और उदासीन हो जाते हैं, उसे लेखक ‘मात्रा से अधिक तमोगुणी’ कहता है। ऐसे राष्ट्र में जीवन की मात्रा ज़रूरत से कम होती है।

चरण 3: जागृति की कामना का भाव:
इसलिए जब हम राष्ट्र की जागृति चाहते हैं, तो हम चाहते हैं कि वहाँ के लोग सजग हों, अपने कर्तव्य में लगें और राष्ट्र प्रगति करे।

अंतिम उत्तर:
राष्ट्र की जागृति का आशय है – आलस्य और जड़ता का अंत तथा राष्ट्र में चेतना, कर्मठता और जीवन-शक्ति का संचार।
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Question: 7

निद्रा को किस गुण की प्रधानता से जोड़ा गया है और क्यों ?

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‘जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है, निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है’ पंक्ति से उत्तर बनाइए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: तुलना से समझना:
गद्यांश में दो क्रियाओं की तुलना है। जागृति रजोगुण-प्रधान है, यानी उसमें गति, उत्साह और कर्म है। इसके उलट निद्रा तमोगुण-प्रधान है।

चरण 2: कारण:
नींद में शरीर और मन काम करना बंद कर देते हैं। कर्म का अभाव, आलस्य और अचेतनता तमोगुण के लक्षण हैं, इसलिए निद्रा में इसी गुण की प्रधानता मानी गई है।

चरण 3: लेखक का निष्कर्ष:
लेखक के अनुसार जागृति जीवन और अभ्युदय की तथा निद्रा पतन और ह्रास की सूचक है। इसी कारण अधिक सोना हानिकारक कहा गया है।

अंतिम उत्तर:
निद्रा को तमोगुण से जोड़ा गया है, क्योंकि उसमें कर्महीनता, आलस्य और जड़ता होती है, जो पतन की ओर ले जाती है।
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