Comprehension

जेठ की जलती धूप में, जब धरित्री निर्धूम अग्निकुंड बनी हुई थी, शिरीष नीचे से ऊपर तक फूलों से लद गया था। कम फूल इस प्रकार की गरमी में फूल सकने की हिम्मत करते हैं। कर्णिकार और आरग्वध (अमलतास) की बात मैं भूल नहीं रहा हूँ। वे भी आस-पास बहुत हैं। लेकिन शिरीष के साथ आरग्वध की तुलना नहीं की जा सकती। वह पंद्रह-बीस दिन के लिए फूलता है, वसंत ऋतु के पलाश की भाँति। कबीरदास को इस तरह पंद्रह दिन के लिए लहक उठना पसंद नहीं था। यह भी क्या कि दस दिन फूले और फिर खंखड़-के-खंखड़ – ‘दिन दस फूला फूलिके खंखड़ भया पलास !’ ऐसे दुमदारों से तो लँडूरे भले। फूल है शिरीष। वसंत के आगमन के साथ लहक उठता है, आषाढ़ तक जो निश्चित रूप से मस्त बना रहता है। मन रम गया तो भरे भादों में भी निर्घात फूलता रहता है। जब उमस से प्राण उबलता रहता है और लू से हृदय सूखता रहता है, एकमात्र शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है। यद्यपि कवियों की भाँति हर फूल-पत्ते को देखकर मुग्ध होने लायक हृदय विधाता ने नहीं दिया है, पर नितांत ठूँठ भी नहीं हूँ। शिरीष के पुष्प मेरे मानस में थोड़ा हिल्लोल ज़रूर पैदा करते हैं।

Question: 1

“शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है।” इस कथन के समर्थन में विकल्प है :

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अवधूत की तरह अविचल और अजेय रहने का भाव चौथे विकल्प में है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • शिरीष के साथ और पेड़ों की तुलना नहीं हो सकती।
  • शिरीष मन रमने पर भादों में भी फूलों से लदा रहता है।
  • शिरीष के पेड़ों पर वसंत ऋतु में फूल आते हैं और आषाढ़ तक रहते हैं।
  • अपनी अजेय जिजीविषा के कारण नि:स्पृह भाव से प्रचंड गरमी में अविचल खड़ा रहता है।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश से संकेत :
गद्यांश में जेठ की जलती धूप, उमस और लू का वर्णन है। इसी में कहा है कि जब प्राण उबलता और हृदय सूखता है, तब भी एकमात्र शिरीष फूलों से लदा रहता है।

चरण 2: मुख्य शब्दों का मिलान :
‘अवधूत’ का गुण है आसक्ति से मुक्त और अविचल रहना, ‘अजेयता’ का अर्थ है हार न मानना। ये दोनों भाव विकल्प 4 के ‘नि:स्पृह’, ‘अजेय जिजीविषा’ और ‘अविचल’ शब्दों से मिलते हैं।

चरण 3: उन्मूलन विधि :
विकल्प 1 शिरीष और आरग्वध की तुलना है, अजेयता का प्रमाण नहीं। विकल्प 2 और 3 फूलने के समय बताते हैं, पर ‘विषम परिस्थितियों में अविचल’ का भाव नहीं बताते। इसलिए इन तीनों से कथन का पूरा समर्थन नहीं होता।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (4) कथन का सबसे उपयुक्त समर्थन करता है।
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Question: 2

‘दिन दस फूला ....’ पंक्ति का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है ?

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पलाश की अल्पायु का उदाहरण देकर लेखक शिरीष की श्रेष्ठता दिखाता है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • पलाश के फूलों की अल्पायु का वर्णन करने के लिए
  • जीवन की नश्वरता का उल्लेख करने के लिए
  • शिरीष के फूलों को औरों से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए
  • जीवन की क्षणभंगुरता का उल्लेख करने के लिए
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश का क्रम देखना :
पहले लेखक कहता है कि शिरीष के साथ आरग्वध की तुलना नहीं हो सकती। फिर पलाश का उदाहरण देकर बताता है कि कबीर को पंद्रह दिन के लिए लहक उठना पसंद नहीं था। उसके तुरंत बाद वह कहता है, ‘फूल है शिरीष’।

चरण 2: उद्देश्य की पहचान :
कबीर की पंक्ति से अल्पायु पलाश का दोष दिखाया गया, ताकि दीर्घकाल तक फूलने वाले शिरीष की महिमा उभरे। इसलिए पंक्ति का संदर्भ तुलना द्वारा शिरीष की श्रेष्ठता प्रकट करना है।

चरण 3: उन्मूलन विधि :
नश्वरता या क्षणभंगुरता की चर्चा विकल्प 2 और 4 में है, जबकि पूरे अंश का मुख्य भाव जीवन की अजेयता है, इसलिए ये दोनों कटते हैं। विकल्प 1 पंक्ति की सामग्री बताता है, संदर्भ नहीं। अतः विकल्प 3 सही बैठता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (3) शिरीष के फूलों को औरों से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए।
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Question: 3

‘नितांत ठूँठ हृदय’ से अभिप्राय है :

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ठूँठ यानी सूखा; इसलिए ठूँठ हृदय का अर्थ रसहीन अर्थात नीरस हृदय है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • नीरस
  • सरस
  • कोमल
  • समृद्धिहीन
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: वाक्य को ध्यान से पढ़ना :
गद्यांश की पंक्ति है : ‘पर नितांत ठूँठ भी नहीं हूँ। शिरीष के पुष्प मेरे मानस में थोड़ा हिल्लोल ज़रूर पैदा करते हैं।’ इसमें ‘पर’ शब्द विरोध बताता है।

चरण 2: विरोध से अर्थ निकालना :
जब फूल हृदय में हलचल पैदा करते हैं, तो ठूँठ न होने का मतलब है कि हृदय भावहीन नहीं है। इसलिए ठूँठ हृदय भावहीन, रसहीन, सूखा हृदय है।

चरण 3: उन्मूलन विधि :
सरस और कोमल दोनों ‘ठूँठ’ के उल्टे अर्थ वाले शब्द हैं, अतः वे कट जाते हैं। समृद्धिहीन धन या वैभव की कमी बताता है, जबकि प्रसंग भावना का है। शेष विकल्प ‘नीरस’ बचता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (1) नीरस।
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Question: 4

निम्नलिखित में हिन्दी मास का नाम नहीं है :

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ज्येष्ठ, आषाढ़ और भाद्रपद हिन्दी महीने हैं। वसंत महीना नहीं, ऋतु का नाम है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • ज्येष्ठ
  • आषाढ़
  • भाद्रपद
  • वसंत
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: पहले हिन्दी मासों की सूची याद करें:
हिन्दी वर्ष के बारह महीने हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। अब इस सूची से प्रत्येक विकल्प का मिलान करना है।

चरण 2: सूची से मिलान:
विकल्प (1) ‘ज्येष्ठ’ सूची में तीसरे स्थान पर है। विकल्प (2) ‘आषाढ़’ चौथे स्थान पर है। विकल्प (3) ‘भाद्रपद’ छठे स्थान पर है। ये तीनों नाम सूची में मिल जाते हैं।

चरण 3: बचे हुए विकल्प का विचार:
‘वसंत’ शब्द इस सूची में कहीं नहीं मिलता। हिन्दी की छह ऋतुओं में वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर गिनी जाती हैं। वसंत इनमें पहली ऋतु है, जो प्रायः चैत्र और वैशाख के आसपास रहती है।

चरण 4: गद्यांश से पुष्टि:
गद्यांश में ‘जेठ’, ‘आषाढ़’ और ‘भादों’ महीनों के रूप में आए हैं, जबकि ‘वसंत के आगमन के साथ लहक उठता है’ पंक्ति में वसंत का अर्थ ऋतु का आना है। इस प्रकार तीन शब्द मास हैं और एक ऋतु।

अंतिम उत्तर:
उत्तर विकल्प (4) ‘वसंत’ है, जो हिन्दी मास नहीं, ऋतु है।
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Question: 5

‘ऐसे दुमदारों से ....’ लोकोक्ति का अर्थ गद्यांश के संदर्भ में है :

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पलाश दस दिन फूलकर सूख जाता है, इसलिए कबीर को कम अवधि का फूलना पसंद नहीं। प्रसंग अवधि का है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • छोटी पूँछ होने से बेहतर है, न होना
  • कम होने से बेहतर है, न होना
  • कम साधनों से साधनहीनता अच्छी है
  • अल्पावधि से अवधिहीनता अच्छी है
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ की पहचान:
गद्यांश में लेखक ने बताया है कि आरग्वध और पलाश पंद्रह-बीस दिन या दस दिन के लिए ही फूलते हैं, जबकि शिरीष वसंत से लेकर आषाढ़ और भादों तक फूलता रहता है। इसी तुलना के बीच कबीर की बात आई है।

चरण 2: निषेध से विचार करें:
यदि विकल्प (3) ‘कम साधनों से साधनहीनता अच्छी है’ मानें तो पंक्ति धन-साधन से जुड़ जाती है, जिसका प्रसंग में कोई आधार नहीं। विकल्प (1) केवल पूँछ की लंबाई की बात करता है, जो पशुओं की उपमा का अक्षरशः अर्थ है, भाव नहीं। विकल्प (2) ‘कम’ शब्द तो रखता है, पर यह नहीं बताता कि कमी किस बात की है।

चरण 3: अर्थ की पुष्टि:
‘दुमदार’ का लक्षण है कि उसमें कुछ दिखावा है, यानी थोड़े दिन का फूल। ‘लँडूरे’ में वह दिखावा भी नहीं है। कबीर के अनुसार कुछ दिन का दिखावा करके सूख जाने से अच्छा है कि उतना भी न किया जाए। यह भाव समय की सीमा यानी अवधि से जुड़ा है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इस भाव को केवल विकल्प (4) ‘अल्पावधि से अवधिहीनता अच्छी है’ ठीक-ठीक व्यक्त करता है, क्योंकि इसमें ‘अल्पावधि’ यानी कम समय और उसके मुकाबले ‘अवधिहीनता’ की तुलना है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (4)।
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