Comprehension

लेखक और प्रकाशक एक-दूसरे के पूरक होते हैं। यदि प्रकाशक नहीं हों, तो लेखकों की कृतियों को लोक-लोचन के सम्मुख प्रस्तुत कौन करेगा और यदि लेखक नहीं हों, तो प्रकाशन के व्यवसाय की शुरुआत कैसे हो, प्रकाशक का जन्म ही कहाँ से हो ?

यह सत्य है कि मूल लेखक है और प्रकाशक उसका तना है, लेकिन तने के विस्तार को सब लोग देखते हैं और मूल की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। वह तो अधिकतर भूमिष्ठ ही रहता है। प्रकाशक की अट्टालिका, मोटर, शानशौकत अब सभी प्रमुख नगरों में हम देख सकते हैं। पर बेचारे लेखक को हम ढूँढने से ही पा सकते हैं।

इस स्वाभाविक स्थिति की विषमता लेखक और प्रकाशक के पारस्परिक सम्बन्धों में तनाव पैदा करती है। मूल और तने के बीच का तनाव कभी सुफल नहीं ला सकता। इस विषम स्थिति से निकलने के लिए दोनों को यह सोचना होगा कि सामंजस्य कैसे स्थापित हो ?

सोचना इसलिए भी जरूरी है कि कुछ लोग इस तनाव को बढ़ाने की ही दिशा में काम करते नज़र आ रहे हैं। वे लेखक से कहते हैं, देखो, तुम्हारा कितना शोषण हो रहा है, ये प्रकाशक जोंक हैं जोंक। इनसे बचो। और प्रकाशक से कहा जाता है, अजी साहब, इस लेखक को जानता कौन था ? यह तो आप हैं, जिसने इसे आसमान पर चढ़ाया !

तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों की हानि हो रही है। यह तनाव दोनों को चौपट कर सकता है। अत: इस पर चिंतन करना अनिवार्य है।

Question: 1

लेखक और प्रकाशक के बीच परस्पर कैसा संबंध है ?

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दूसरे अनुच्छेद में लिखा है कि मूल लेखक है और प्रकाशक उसका तना है, इसलिए विकल्प 2 सही है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • फूल और पत्ते जैसा
  • मूल और तने जैसा
  • फल और शाखा जैसा
  • कली और फूल जैसा
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश के भाव से उत्तर निकालना:
गद्यांश की शुरुआत में लेखक और प्रकाशक को एक-दूसरे का पूरक बताया गया है। आगे उपमा देकर कहा गया है कि प्रकाशक का तना सबको दिखता है, पर भूमि के भीतर रहने वाले मूल पर ध्यान नहीं जाता।
आगे भी मूल और तने के बीच तनाव की बात कही गई है।

चरण 2: छाँटने की विधि:
गद्यांश में बार-बार आने वाले शब्द मूल और तना हैं। फूल, पत्ते, फल, शाखा या कली शब्द कहीं नहीं आते।
इसलिए विकल्प 1, 3 और 4 छोड़ दिए जाते हैं, क्योंकि इनकी तुलना पाठ में नहीं है।
केवल विकल्प 2 में गद्यांश की उपमा ठीक वैसी ही दी गई है।

अंतिम उत्तर:
लेखक और प्रकाशक का संबंध मूल और तने जैसा है, अतः उत्तर विकल्प 2 है।
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Question: 2

प्रस्तुत गद्यांश में लेखक और प्रकाशक के बीच किस प्रकार का संबंध बताया गया है ?

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तीसरे अनुच्छेद की पंक्ति ‘पारस्परिक सम्बन्धों में तनाव पैदा करती है’ देखिए। इसी से उत्तर मिल जाता है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • परस्पर सहयोग का
  • पारस्परिक प्रतिस्पर्धा का
  • पारस्परिक प्रेम का
  • पारस्परिक तनाव का
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का आशय समझना:
प्रश्न पूछता है कि गद्यांश में दोनों के बीच किस प्रकार का संबंध बताया गया है। इसका उत्तर उस पंक्ति में मिलेगा जहाँ लेखक सीधे ‘संबंध’ शब्द का प्रयोग करता है।

चरण 2: निर्णायक पंक्ति खोजना:
तीसरे अनुच्छेद की पंक्ति है – ‘इस स्वाभाविक स्थिति की विषमता लेखक और प्रकाशक के पारस्परिक सम्बन्धों में तनाव पैदा करती है।’
यहाँ संबंधों के साथ सीधे तनाव का नाम लिया गया है, इसलिए यही गद्यांश का कथ्य है।

चरण 3: उत्तर को छाँटकर देखना (विलोपन विधि):
‘सहयोग’ और ‘प्रेम’ वे गुण हैं जिनकी लेखक ने अपेक्षा की है, वे वर्तमान स्थिति नहीं हैं, इसलिए (1) और (3) हटाइए।
‘प्रतिस्पर्धा’ शब्द पूरे गद्यांश में कहीं नहीं आया, इसलिए (2) भी हटाइए।
शेष बचा विकल्प (4) ‘पारस्परिक तनाव का’ है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (4) – पारस्परिक तनाव का।
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Question: 3

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : प्रकाशक की स्थिति लेखक से अधिक स्पष्ट है।

कारण : लेखक को ढूँढना कठिन है जबकि प्रकाशक की भौतिक समृद्धि आसानी से दिखती है।

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कथन और कारण दोनों गद्यांश से मेल खाते हैं। पर देखिए कि गद्यांश प्रकाशक के अधिक दिखने का मूल आधार मूल और तने के संबंध को बताता है, वैभव तो उसका उदाहरण है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता।
  • कथन सही है, कारण गलत है।
  • कथन गलत है, कारण सही है।
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: कथन-कारण प्रश्न का नियम:
ऐसे प्रश्न में पहले कथन और कारण को अलग-अलग परखते हैं। फिर देखते हैं कि गद्यांश ने कथन की जो वजह बताई है, क्या वही कारण में लिखी है।

चरण 2: दोनों का सत्य होना:
दूसरे अनुच्छेद में ‘तने के विस्तार को सब लोग देखते हैं’ – इससे कथन सही सिद्ध होता है। उसी अनुच्छेद में ‘प्रकाशक की अट्टालिका, मोटर, शानशौकत’ और ‘बेचारे लेखक को हम ढूँढने से ही पा सकते हैं’ – इससे कारण भी सही सिद्ध होता है।

चरण 3: व्याख्या का परीक्षण:
गद्यांश के अनुसार प्रकाशक की स्थिति इसलिए स्पष्ट है कि वह तना है और लेखक मूल है, जो धरती के भीतर छिपा रहता है। यह दोनों के संबंध की बनावट है। कारण में केवल यह बताया गया है कि प्रकाशक का वैभव दिखता है और लेखक मुश्किल से मिलता है। यह उसी स्थिति का एक दिखने वाला लक्षण है, कथन का मूल आधार नहीं। इसलिए कारण कथन की पूरी और सही व्याख्या नहीं करता।

चरण 4: निष्कर्ष:
कथन सही, कारण सही, पर कारण कथन की सही व्याख्या नहीं – यह स्थिति विकल्प (2) में है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (2)।
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Question: 4

गद्यांश के अनुसार ‘वह तो अधिकतर भूमिष्ठ ही रहता है’ – कौन भूमिष्ठ रहता है और क्यों ?

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‘मूल’ यानी जड़ लेखक है। जड़ ज़मीन में छिपी रहती है, इसलिए उस पर किसी की नज़र नहीं जाती।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: उपमा का अर्थ खोलना:
लेखक ने एक वृक्ष का उदाहरण लिया है – मूल (जड़) लेखक है और तना प्रकाशक है। वृक्ष की जड़ मिट्टी में छिपी रहती है, जबकि तना ऊपर फैला हुआ सबको दिखता है।

चरण 2: उत्तर का पहला भाग – कौन:
इस उपमा के अनुसार जो मिट्टी में छिपा रहता है वह जड़ है, अर्थात लेखक। अतः भूमिष्ठ रहने वाला लेखक है।

चरण 3: उत्तर का दूसरा भाग – क्यों:
प्रकाशक की अट्टालिका, मोटर और शानशौकत नगरों में सबको दिखती है, पर लेखक ‘ढूँढने से ही’ मिलता है। समाज का ध्यान उसकी ओर नहीं जाता, इसलिए वह छिपा और उपेक्षित रहता है।

अंतिम उत्तर:
लेखक भूमिष्ठ रहता है, क्योंकि उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता और सबकी दृष्टि प्रकाशक के बाहरी वैभव पर टिकी रहती है।
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Question: 5

लेखक और प्रकाशक दोनों कैसे एक-दूसरे के पूरक हैं ? किन्हीं दो तर्कों द्वारा पुष्टि कीजिए।

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पहले अनुच्छेद के दोनों प्रश्नों को तर्क बनाइए – प्रकाशक न हो तो कृतियाँ कौन प्रस्तुत करेगा, लेखक न हो तो प्रकाशन कैसे शुरू होगा।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: ‘पूरक’ का अर्थ:
पूरक वह है जो दूसरे की कमी को पूरा करे। लेखक और प्रकाशक एक-दूसरे की कमी पूरी करते हैं, यही दो तर्कों से दिखाना है।

चरण 2: तर्क एक – रचना और प्रसार का संबंध:
लेखक रचना करता है, पर उसे समाज तक पहुँचाने का साधन उसके पास नहीं होता। यह काम प्रकाशक करता है। गद्यांश कहता है कि प्रकाशक के न होने पर कृतियों को लोगों के सामने प्रस्तुत कौन करेगा ?

चरण 3: तर्क दो – व्यवसाय और सामग्री का संबंध:
प्रकाशक का व्यवसाय पुस्तकों पर टिका है और पुस्तकें लेखक लिखता है। लेखक न हो तो प्रकाशन का कार्य शुरू ही नहीं होगा। लेखक ने इसी बात को प्रश्न के रूप में पूछा है – ‘प्रकाशक का जन्म ही कहाँ से हो ?’

अंतिम उत्तर:
लेखक के बिना प्रकाशक के पास छापने को कुछ नहीं होगा और प्रकाशक के बिना लेखक की रचना पाठकों तक नहीं पहुँचेगी; इसलिए दोनों पूरक हैं।
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Question: 6

लेखक और प्रकाशक के बीच संबंधों में सुधार किस प्रकार आ सकता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

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तीसरे और चौथे अनुच्छेद को देखिए। सामंजस्य की बात और तनाव बढ़ाने वालों से बचने की बात यहीं मिलती है।
Updated On: Oct 27, 2026
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चरण 1: प्रश्न के उत्तर का स्रोत:
उत्तर गद्यांश के अंतिम तीन अनुच्छेदों में है, जहाँ लेखक तनाव के बाद समाधान की ओर बढ़ता है।

चरण 2: बिंदु एक – चिंतन और समझदारी:
अंत में लिखा है – ‘इस पर चिंतन करना अनिवार्य है।’ अतः पहला उपाय यह है कि लेखक और प्रकाशक दोनों इस विषय पर गंभीर चिंतन करें और समझें कि दोनों की हानि हो रही है।

चरण 3: बिंदु दो – परस्पर विश्वास:
लोग लेखक को प्रकाशक के विरुद्ध और प्रकाशक को लेखक के विरुद्ध भड़काते हैं। इसका उपाय यह है कि दोनों आपस में विश्वास रखें, एक-दूसरे की भूमिका को सम्मान दें और बीच में आने वालों की बातों पर ध्यान न दें।

अंतिम उत्तर:
संबंध सुधारने के दो बिंदु – मिलकर सामंजस्य के उपाय सोचना तथा भड़काने वालों से बचते हुए आपसी विश्वास और सम्मान बनाए रखना।
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Question: 7

लेखक और प्रकाशक के संबंधों में दूरी बढ़ने के क्या कारण हैं ? इस दूरी के बढ़ने से क्या हानि हो रही है ?

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कारण के लिए दूसरे, तीसरे और चौथे अनुच्छेद को देखिए तथा हानि के लिए अंतिम अनुच्छेद की पंक्तियाँ पढ़िए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न के दो भाग:
प्रश्न में दो बातें पूछी गई हैं – दूरी के कारण और उस दूरी से होने वाली हानि। दोनों का उत्तर अलग-अलग लिखना चाहिए।

चरण 2: पहला भाग – कारण:
पहला कारण यह है कि प्रकाशक की समृद्धि सबको दिखती है और लेखक की उपेक्षा होती है, यह ‘स्वाभाविक स्थिति की विषमता’ है। दूसरा कारण यह है कि कुछ लोग जान-बूझकर तनाव बढ़ाने का काम करते हैं – लेखक को शोषण का और प्रकाशक को उपकार का एहसास दिलाकर।

चरण 3: दूसरा भाग – हानि:
लेखक के अनुसार इस तनाव से कभी अच्छा फल नहीं निकल सकता। दोनों की हानि हो रही है, क्योंकि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, और यह स्थिति दोनों को चौपट (बरबाद) कर सकती है।

अंतिम उत्तर:
दूरी का कारण विषमता और भड़काने वाली बातें हैं; हानि यह है कि लेखक तथा प्रकाशक दोनों का अहित हो रहा है और दोनों के नष्ट होने का खतरा है।
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