चरण 1: प्रसंग:
प्रस्तुत सुभाषित उत्तर प्रदेश बोर्ड की कक्षा 12 की ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के पाठ ‘सुभाषितरत्नानि’ का है। इसमें नित्य अभ्यास के महत्त्व को एक सरल उदाहरण से समझाया गया है।
चरण 2: पदों का अर्थ:
निपातेन = गिरने से। पूर्यते = भरा जाता है। सर्वविद्यानाम् = सब प्रकार की विद्याओं का। च = और। हेतुः = साधन, मूल कारण।
चरण 3: अनुवाद:
पानी की बूँदें एक-एक करके गिरती रहें तो थोड़े समय में घड़ा भर जाता है। इसी प्रकार सब विद्याओं, धर्म और धन को पाने का मूल कारण भी यही धीरे-धीरे किया गया लगातार प्रयास है।
चरण 4: सार और शिक्षा:
कोई भी बड़ा लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों से पूरा होता है। विद्यार्थी को रोज थोड़ा पढ़ना चाहिए और निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि निरन्तरता ही सफलता की कुंजी है।