Comprehension

है दीप एक पर मोल सूर्य से भी भारी

है व्यक्ति एक वर्तिका, दीप धरती सारी

देखो न दुखी हो व्यक्ति, उठे इंसानी लौ,

वनखंड जलाती सिर्फ एक ही चिनगारी।

है झंझापथ, पद आहत, दीपक मद्धिम है

संघर्ष, रातकाली, मंजिल पर रिमझिम है

लेकिन पुकारता आ पहुँचा युग इंसानी

दो कदम रह गया स्वर्ग चढ़ाई अन्तिम है।

दीपक, तेरे नीचे घिर रहा अँधेरा है

सोने की चमक तले अनीति का डेरा है

तू इंसानी जीवन की रात मिटा, वरना

इंसान स्वयं बनकर आ रहा सवेरा है।

Question: 1

‘है दीप एक ....... सूर्य से भी भारी’ – पंक्ति का आशय है –

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दूसरी पंक्ति 'है व्यक्ति एक वर्तिका' बताती है कि दीप मनुष्य का प्रतीक है।
Updated On: Oct 31, 2026
  • एक अकेला शोषित व्यक्ति, संपूर्ण शोषक वर्ग से शक्तिशाली है।
  • अकेला दीपक सूर्य के प्रकाश से अधिक प्रकाश प्रदान करने में सक्षम है।
  • एक अकेला प्रकाश का स्रोत सूर्य से अधिक मूल्यवान है।
  • दीपक सूर्य की ऊर्जा से अधिक ऊर्जा अपने भीतर रखता है।
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: शाब्दिक विकल्प हटाएँ:
विकल्प 2 (अधिक प्रकाश) और विकल्प 4 (अधिक ऊर्जा) वैज्ञानिक रूप से भी सही नहीं हैं और कविता के भाव से भी मेल नहीं खाते।
विकल्प 3 (प्रकाश का स्रोत अधिक मूल्यवान) में 'मोल' शब्द तो है, पर वह दीपक को केवल प्रकाश-स्रोत मानता है, उसका प्रतीकात्मक अर्थ छोड़ देता है।

चरण 2: पूरे काव्यांश का भाव:
कविता में 'इंसानी लौ', 'युग इंसानी', 'इंसान स्वयं बनकर आ रहा सवेरा है' जैसे शब्द बार-बार आते हैं।
स्पष्ट है कि कवि साधारण मनुष्य के संघर्ष और जागरण की बात कर रहा है।
'दीपक, तेरे नीचे घिर रहा अँधेरा है / सोने की चमक तले अनीति का डेरा है' - यहाँ वैभवशाली वर्ग के अन्याय और शोषण की ओर इशारा है।

चरण 3: निष्कर्ष:
अतः 'एक दीप' संघर्षरत, शोषित व्यक्ति है और 'सूर्य' शक्तिशाली शोषक वर्ग।
कवि कहता है कि एक दीप का मोल सूर्य से भी भारी है, अर्थात अकेला शोषित व्यक्ति भी पूरे शोषक वर्ग पर भारी पड़ सकता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (1) - एक अकेला शोषित व्यक्ति, संपूर्ण शोषक वर्ग से शक्तिशाली है।
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Question: 2

‘इंसानी जीवन की रात मिटा’ – से क्या अभिप्राय है ?

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'दीपक के नीचे अँधेरा' और 'सोने की चमक तले अनीति' पर ध्यान दीजिए। 'रात' यहाँ शोषितों के अभाव का प्रतीक है।
Updated On: Oct 31, 2026
  • शोषित वर्ग के जीवन से रात्रि को दूर करना
  • शोषित वर्ग के घरों को प्रकाशित करना
  • इंसानों के जीवन से अंधकार को दूर करना
  • शोषित वर्ग के अभावों को दूर कर, उन्हें अधिकार देना
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्पों को परखना (निरसन विधि):
विकल्प 1 - 'रात्रि को दूर करना' शब्दशः अर्थ है। रात को कोई मिटा नहीं सकता, अतः यह कवि का आशय नहीं है।
विकल्प 2 - 'घरों को प्रकाशित करना' भी केवल बाहरी रोशनी की बात है, जबकि कविता का स्वर सामाजिक है।
विकल्प 3 - 'इंसानों के जीवन से अंधकार' सामान्य है, इसमें शोषण और अनीति का भाव नहीं आता।

चरण 2: काव्यांश से प्रमाण:
कवि दीपक से कहता है कि उसके नीचे अँधेरा घिर रहा है और सोने की चमक के नीचे अनीति का डेरा है।
इसका अर्थ है कि समृद्ध वर्ग की चमक के पीछे गरीब और शोषित लोगों का दुख है।
कवि चेतावनी देता है कि यदि यह 'रात' न मिटी तो इंसान स्वयं सवेरा बनकर आएगा।

चरण 3: निष्कर्ष:
इसलिए 'इंसानी जीवन की रात' शोषित वर्ग का अभाव और अधिकारहीनता है, और उसे मिटाने का अर्थ उन्हें अधिकार देना है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (4) है।
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Question: 3

कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुमेलित कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :

कॉलम-1कॉलम-2
(क) मद्धिम दीपक(1) लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन
(ख) झंझापथ(2) विपरीत परिस्थितियाँ
(ग) आहत पद(3) घायल अंग

विकल्प :

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'झंझा' का अर्थ तूफ़ान और 'आहत' का अर्थ घायल है। इन दो शब्दों से जोड़ियाँ आसानी से बन जाती हैं।
Updated On: Oct 31, 2026
  • क-2, ख-3, ग-1
  • क-1, ख-2, ग-3
  • क-3, ख-1, ग-2
  • क-1, ख-3, ग-2
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: सबसे स्पष्ट जोड़ी से आरंभ:
'आहत' शब्द का सीधा अर्थ 'घायल' है। अतः 'आहत पद' का मेल 'घायल अंग' (3) से होगा, यानी ग-3।
यह जोड़ी केवल विकल्प (2) में है। विकल्प (1) में ग-1, विकल्प (3) में ग-2 और विकल्प (4) में ग-2 है, इसलिए ये तीनों हट जाते हैं।

चरण 2: बाकी जोड़ियों की पुष्टि:
पंक्ति है - 'है झंझापथ, पद आहत, दीपक मद्धिम है।'
'झंझापथ' यानी आँधी भरा मार्ग, जो विपरीत परिस्थितियों को दिखाता है - ख-2।
'दीपक मद्धिम' यानी रोशनी कम है, अर्थात मंज़िल तक पहुँचने के साधन सीमित हैं - क-1।

चरण 3: निष्कर्ष:
तीनों जोड़ियाँ विकल्प (2) से पूरी तरह मेल खाती हैं।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प (2) है।
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Question: 4

‘इंसान स्वयं सवेरे का रूप धारण कर आ रहा है’ - पंक्ति के माध्यम से किसे क्या चेतावनी दी गई है ?

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'वरना' शब्द पर ध्यान दीजिए। दीपक किसका प्रतीक है और सवेरा किसका, यह सोचिए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रतीकों को समझना:
कविता में 'दीपक' वह वर्ग है जो चमकता है पर उसके नीचे अँधेरा है, यानी धनी और शक्तिशाली वर्ग।
'सवेरा' नए युग, जागृति और परिवर्तन का प्रतीक है।

चरण 2: पंक्ति का भाव:
'इंसान स्वयं बनकर आ रहा सवेरा है' का अर्थ है कि आम आदमी अब चुप नहीं रहेगा। वह अपने अधिकारों के लिए खुद उठ खड़ा होगा।
पंक्ति के पहले 'वरना' शब्द इसे स्पष्ट चेतावनी बनाता है।

चरण 3: चेतावनी का स्वरूप:
संपन्न वर्ग से कहा गया है कि समय रहते अनीति और शोषण छोड़ दे, नहीं तो जनशक्ति स्वयं उसका अंत कर देगी।

अंतिम उत्तर:
संपन्न शोषक वर्ग (दीपक) को चेतावनी है कि शोषितों के दुख दूर करे, अन्यथा जाग्रत जनता स्वयं परिवर्तन लाकर उसकी सत्ता मिटा देगी।
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Question: 5

‘वनखंड जलाती है एक चिनगारी’ – पंक्ति से क्या अभिप्राय है ?

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चिनगारी एक व्यक्ति का और वनखंड पूरे समाज या अन्याय का प्रतीक है। एक की शक्ति पर विचार कीजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रतीक पहचानना:
'चिनगारी' - एक साहसी, जागरूक व्यक्ति।
'वनखंड' - विशाल समाज या अन्याय की बड़ी व्यवस्था।

चरण 2: काव्यांश से जोड़ना:
कवि ने कहा है - 'है व्यक्ति एक वर्तिका, दीप धरती सारी।' यानी हर व्यक्ति एक बाती है और पूरी धरती दीपक है।
इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए कवि बताता है कि छोटी शक्ति भी बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

चरण 3: आशय:
किसी भी बड़े आंदोलन की शुरुआत एक व्यक्ति से होती है। उसकी 'इंसानी लौ' दूसरों में भी जोश जगाती है और धीरे-धीरे पूरा समाज बदल जाता है।
अतः व्यक्ति को अपनी शक्ति पर विश्वास रखना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
इस पंक्ति का अभिप्राय है कि एक व्यक्ति की छोटी-सी पहल या जागृति भी विशाल अन्याय को मिटाकर पूरे समाज को बदल सकती है।
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Question: 6

‘इंसानी युग आने और स्वर्ग के दो कदम दूर रह जाने’ – से क्या आशय है ?

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'लेकिन' के बाद आए आशा के भाव को देखिए। 'स्वर्ग' यहाँ सुखी और न्यायपूर्ण समाज का प्रतीक है।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पहले की कठिनाइयाँ:
कवि बताता है कि रास्ता आँधी भरा है, पैर घायल हैं, दीपक धीमा है और रात काली है। यह सब संघर्ष की कठिन स्थिति दिखाता है।

चरण 2: 'लेकिन' से आशा का भाव:
'लेकिन' शब्द के बाद कविता का स्वर बदल जाता है। कवि कहता है कि इन बाधाओं के होते हुए भी इंसानियत का युग आ पहुँचा है।
लोग अब जाग गए हैं और अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

चरण 3: 'स्वर्ग' और 'अंतिम चढ़ाई':
'स्वर्ग' का अर्थ है शोषण-मुक्त, सुखी और समान समाज। 'दो कदम' और 'अंतिम चढ़ाई' बताते हैं कि मंज़िल बहुत पास है।
कवि प्रेरणा देता है कि इस अंतिम क्षण में धैर्य और साहस न छोड़ें।

अंतिम उत्तर:
मानवता और समानता का नया युग आ चुका है और आदर्श समाज रूपी लक्ष्य अब निकट है; अंतिम संघर्ष पूरा करते ही वह मिल जाएगा।
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