Question:medium

दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
जयन्ति ते महाभागा जन-सेवा-परायणाः ।
जरामृत्युभयं नास्ति येषां कीर्तितनोः क्वचित् ॥

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पद्य कक्षा 12 की ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के छठे पाठ ‘महामना मालवीयः’ में आया है। पाठ में पण्डित मदनमोहन मालवीय के सेवामय जीवन का परिचय दिया गया है, और यह श्लोक उनके जैसे लोकसेवकों की महिमा बताता है।

चरण 2: अर्थ के मुख्य बिन्दु:
महाभागाः = महान भाग्यशाली पुरुष। परायणाः = पूरी तरह समर्पित। तनुः = शरीर। कीर्तितनुः = कीर्ति ही जिसका शरीर है। नास्ति = नहीं है।

चरण 3: अनुवाद:
वे महान भाग्यशाली लोग विजयी होते हैं, जो जन-सेवा के काम में पूरी तरह लगे रहते हैं। उनके कीर्ति-रूपी शरीर को बुढ़ापे या मृत्यु का डर कभी और कहीं नहीं सताता।

चरण 4: सार:
जनहित के काम करने वाले अपने यश में सदा जीवित रहते हैं। शरीर मिट सकता है, पर अच्छे कर्मों की कीर्ति अमर रहती है।
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