Comprehension

संस्कृति और सभ्यता - ये दोनों दो शब्द हैं और उनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी बाहरी उन्नति करता है। संस्कृति मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है, दया, ममता और परोपकार आदि सीखता है, गीत-नाद, कविता, चित्र और मूर्ति से आनन्द लेने की योग्यता हासिल करता है। एक वह भी समय था जब आदमी को घर बनाना नहीं आता था, जब वह पेड़ की छाया या पहाड़ की खोह में वास करता था; जब खेती करना भी नहीं आता था और वह कन्द-मूल खाकर गुजारा करता था; जब उसे कपड़ा बुनना भी नहीं आता था और वह या तो निर्वस्त्र रहता था या पेड़ों की छाल या जानवरों की खाल पहनकर रहता था। इस हालत को मनुष्य की असभ्यता की हालत कहते हैं। लेकिन, इस हालत से निकलकर आदमी ज्यों-ज्यों आगे बढ़ा, त्यों-त्यों वह सभ्य होता गया। यानी जब आदमी खेती करके अनाज उपजाने लगा, अनाज को आग से पकाकर खाने लगा, घर बनाकर रहने और कपड़े बुनकर उन्हें पहनने लगा, तब वह असभ्यता से निकलकर सभ्यता की ओर आने लगा। आज भी रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक, ये सभ्यता की पहचान हैं और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर, संस्कृति इन सबसे भिन्न है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है; मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है। भोजन की सामग्री हम सभ्यता के जरिये पैदा करते हैं, लेकिन जिस ढंग से हम भोजन तैयार करते हैं और जिस कला से हम उसे खाते हैं वह हमारी संस्कृति कहलाती है।

Question: 1

संस्कृति सभ्यता से भिन्न है क्योंकि संस्कृति –

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सभ्यता बाहरी और दिखने वाली उन्नति है, संस्कृति भीतरी और अनुभव की जाने वाली। इसलिए संस्कृति सूक्ष्म है।
Updated On: Oct 21, 2026
  • सभ्यता की अपेक्षा स्थूल और विशद होती है
  • सभ्यता की अपेक्षा अत्यंत सूक्ष्म होती है
  • समन्वयमूलक है और सभ्यता सूक्ष्म होती है
  • आदर्शमूलक है और सभ्यता यथार्थ होती है
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: उदाहरणों से शुरुआत:
गद्यांश में दो तरह की बातें गिनाई गई हैं। एक ओर मोटर, मकान, भोजन और कपड़े हैं। दूसरी ओर मोटर बनाने की कला, मकान बनाने की रुचि और भोजन करने का ढंग है।

चरण 2: दोनों सूचियों का अंतर:
पहली सूची की चीजें देखी और गिनी जा सकती हैं। ये बाहरी विकास यानी सभ्यता हैं।
दूसरी सूची की चीजें कौशल, पसंद और संस्कार हैं। इन्हें हम चीज की तरह नहीं पकड़ सकते। ये भीतरी विकास यानी संस्कृति हैं।
जो चीज दिखाई न दे और केवल अनुभव से समझी जाए, उसे सूक्ष्म कहते हैं। इसलिए संस्कृति सूक्ष्म है।

चरण 3: गलत विकल्प हटाना:
विकल्प (1) में संस्कृति को स्थूल कहा गया है। यह बात सभ्यता पर लागू होती है, इसलिए यह गलत है।
विकल्प (3) में ‘समन्वयमूलक’ शब्द गद्यांश में कहीं नहीं आया, और इसमें सभ्यता को सूक्ष्म बताया गया है, जो उलटी बात है।
विकल्प (4) में ‘आदर्शमूलक’ और ‘यथार्थ’ जैसे शब्द गद्यांश से बाहर के हैं। गद्यांश का आधार बाहरी और भीतरी उन्नति है।

चरण 4: बचा हुआ विकल्प:
अब केवल विकल्प (2) बचता है, जो गद्यांश के अर्थ से पूरी तरह मेल खाता है।

अंतिम उत्तर:
संस्कृति सभ्यता से इसलिए भिन्न है कि वह उससे अत्यंत सूक्ष्म है। सही विकल्प (2) है।
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Question: 2

गद्यांश के अनुसार ‘सभ्यता’ का अभिप्राय क्या है ?

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गद्यांश में सभ्यता को मनुष्य की बाहरी उन्नति कहा गया है। खेती, घर और कपड़े तक का क्रम भौतिक विकास है।
Updated On: Oct 21, 2026
  • मानव को कलाकार बना देने की विशेषता
  • मानव के स्वाधीन चिंतन की गाथा
  • मनुष्य की ऐश्वर्यपूर्ण कहानी
  • मनुष्य के भौतिक विकास का क्रम
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: मुख्य शब्द पहचानना:
प्रश्न में ‘सभ्यता’ का अर्थ पूछा गया है। इसलिए हमें गद्यांश में वे वाक्य ढूँढने हैं जिनमें ‘सभ्य’ या ‘सभ्यता’ शब्द आया है।

चरण 2: संबंधित वाक्य:
पहला वाक्य: ‘सभ्यता मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी बाहरी उन्नति करता है।’
दूसरा वाक्य: ‘आदमी ज्यों-ज्यों आगे बढ़ा, त्यों-त्यों वह सभ्य होता गया।’
तीसरा वाक्य: ‘रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक, ये सभ्यता की पहचान हैं।’
तीनों वाक्य बाहरी साधनों में बढ़ती हुई प्रगति की ओर संकेत करते हैं।

चरण 3: अर्थ निकालना:
‘ज्यों-ज्यों आगे बढ़ा’ शब्द एक क्रम को दिखाते हैं। ‘बाहरी उन्नति’ और मकान, भोजन, पोशाक जैसी चीजें भौतिक पक्ष को दिखाती हैं। दोनों को जोड़ने पर ‘भौतिक विकास का क्रम’ अर्थ बनता है।

चरण 4: अन्य विकल्पों से मिलान:
कलाकार बनना और रुचि का विकास संस्कृति की बातें हैं, इसलिए (1) उचित नहीं। स्वाधीन चिंतन और ऐश्वर्य की चर्चा गद्यांश में है ही नहीं, इसलिए (2) और (3) भी उचित नहीं।

अंतिम उत्तर:
सभ्यता का अभिप्राय है मनुष्य के भौतिक विकास का क्रम। सही विकल्प (4) है।
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Question: 3

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : संस्कृति से मनुष्य दया, ममता, परोपकार आदि गुण और कला का रसास्वादन करना सीखता है।

कारण : संस्कृति मनुष्य के मानवीय मूल्यों और कौशल का विकास करती है।

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गद्यांश में संस्कृति से दया, ममता, परोपकार और कला का आनंद सीखना बताया गया है। कथन और कारण दोनों सही हैं और एक ही बात को समझाते हैं।
Updated On: Oct 21, 2026
  • कथन सही है, कारण गलत है।
  • कथन गलत है, कारण सही है।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • कथन और कारण दोनों गलत हैं।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्प बाँटकर देखना:
चारों विकल्पों में दो बातें जाँचनी हैं। पहली, कथन सही है या गलत। दूसरी, कारण सही है या गलत।

चरण 2: गद्यांश से प्रमाण:
गद्यांश कहता है, ‘संस्कृति मनुष्य का वह गुण है जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है, दया, ममता और परोपकार आदि सीखता है।’
इसी वाक्य में आगे है कि वह कविता, चित्र और मूर्ति से आनन्द लेने की योग्यता भी पाता है। यह कथन का पूरा समर्थन है।

चरण 3: कथन और कारण का संबंध:
कथन में गिनाए गुण दया, ममता, परोपकार और कला की समझ हैं। ये मानवीय मूल्य भी हैं और भीतर का कौशल भी। कारण इन्हीं दोनों शब्दों में बात कहता है। इसलिए कारण कथन के पीछे का सामान्य सत्य है।

चरण 4: विकल्प हटाना:
कथन सही निकला, इसलिए (2) और (4) हट गए, क्योंकि उनमें कथन को गलत कहा गया है। कारण भी सही निकला, इसलिए (1) हट गया, क्योंकि उसमें कारण गलत बताया गया है।

अंतिम उत्तर:
बचा हुआ विकल्प (3) है: कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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Question: 4

‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ के अंतर को उचित उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।

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सभ्यता वस्तुएँ हैं, जैसे मोटर। संस्कृति उन्हें बनाने की कला और रुचि है।
Updated On: Oct 21, 2026
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चरण 1: अंतर की कसौटी तय करना:
इस प्रश्न में अंतर साफ दिखाने के लिए एक ही चीज को दो रूपों में देखना ठीक रहेगा। हम भोजन का उदाहरण लेते हैं, जो गद्यांश में भी आया है।

चरण 2: भोजन के उदाहरण से सभ्यता:
गद्यांश कहता है, ‘भोजन की सामग्री हम सभ्यता के जरिये पैदा करते हैं।’ अनाज उपजाना, उसे आग पर पकाना और अच्छा भोजन तैयार रखना बाहरी साधन हैं। ये सभ्यता के अंतर्गत आते हैं।

चरण 3: भोजन के उदाहरण से संस्कृति:
गद्यांश आगे कहता है कि जिस ढंग से हम भोजन तैयार करते हैं और जिस कला से उसे खाते हैं, वह हमारी संस्कृति कहलाती है। यहाँ चीज नहीं, ढंग और कला महत्त्वपूर्ण है।

चरण 4: निष्कर्ष:
सभ्यता से हमें साधन मिलते हैं और संस्कृति से उन साधनों को बरतने की सुरुचि मिलती है।

अंतिम उत्तर:
सभ्यता भोजन की सामग्री जुटाने जैसी बाहरी बात है, जबकि संस्कृति उसे तैयार करने और खाने का सलीका है।
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Question: 5

‘सभ्यता और संस्कृति दोनों साथ-साथ चलते हैं’ – कैसे ? उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

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मकान या मोटर सभ्यता है, और उन्हें बनाने की रुचि या कला संस्कृति है। बिना दूसरे के दोनों अधूरे हैं।
Updated On: Oct 21, 2026
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चरण 1: विकास के क्रम से बात शुरू करना:
गद्यांश बताता है कि मनुष्य पहले पेड़ की छाया और पहाड़ की खोह में रहता था। फिर उसने खेती करना, भोजन पकाना, घर बनाना और कपड़े बुनना सीखा। यह सभ्यता का विकास है।

चरण 2: विकास के पीछे का गुण:
खेती करना, घर बनाना और कपड़ा बुनना सीखने के लिए बुद्धि, कौशल और रुचि चाहिए। ये गुण भीतर से आते हैं और संस्कृति कहलाते हैं। यदि ये गुण न हों तो बाहरी विकास हो ही नहीं सकता।

चरण 3: दोनों का संबंध:
जैसे-जैसे मनुष्य के साधन बढ़ते हैं, वैसे-वैसे उसकी कला और रुचि भी निखरती है। एक बाहर दिखता है, दूसरा भीतर रहता है, पर दोनों साथ बढ़ते हैं।

अंतिम उत्तर:
सभ्यता के हर कदम में संस्कृति का कौशल और रुचि जुड़ी होती है, इसलिए दोनों साथ-साथ चलते हैं। उदाहरण के लिए, मोटर के साथ मोटर बनाने की कला चलती है।
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Question: 6

“संस्कृति असल में शरीर का नहीं आत्मा का गुण है।” इस कथन को गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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संस्कृति भीतरी उन्नति है: दया, ममता, परोपकार, कला का आनंद। ये मन से जुड़े हैं, इसलिए आत्मा के गुण हैं।
Updated On: Oct 21, 2026
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चरण 1: प्रश्न की दिशा:
हमें यह दिखाना है कि संस्कृति के लक्षण आत्मा से मेल खाते हैं, शरीर से नहीं। इसके लिए संस्कृति की बातें एक-एक करके गिनते हैं।

चरण 2: संस्कृति के लक्षण:
पहला लक्षण दया, ममता और परोपकार है। ये हृदय की भावनाएँ हैं।
दूसरा लक्षण कविता, गीत, चित्र और मूर्ति का आनन्द लेना है। यह मन के रस की बात है।
तीसरा लक्षण मकान बनाने की रुचि और मोटर बनाने की कला है। यह भीतर के कौशल की बात है।

चरण 3: शरीर से जुड़ी बातें कौन सी हैं:
खाना, पहनना और रहने के लिए मकान बनाना जीवन की आवश्यकताएँ हैं। गद्यांश इन्हें सभ्यता की पहचान कहता है, संस्कृति की नहीं।

चरण 4: निष्कर्ष:
संस्कृति के सब लक्षण भीतर के हैं। इस कारण लेखक का कहना ठीक है कि वह शरीर की नहीं, आत्मा की चीज है।

अंतिम उत्तर:
दया, ममता, परोपकार, कला का आनंद और रुचि जैसे भीतरी गुण संस्कृति में आते हैं, इसलिए संस्कृति आत्मा का गुण है।
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Question: 7

सभ्यता के विकास से पूर्व मनुष्य की क्या स्थिति थी ? सभ्यता के विकास के क्या परिणाम हुए ?

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पहले मनुष्य खोह में रहता, कन्द-मूल खाता और खाल पहनता था। विकास के बाद खेती, घर, कपड़े और आधुनिक साधन आए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: उत्तर के लिए तालिका बनाना:
हम पहले और बाद की हालत की तुलना तीन बातों पर करेंगे: रहना, खाना और पहनना। यह तरीका उत्तर को साफ और क्रम से रखता है।

चरण 2: पहले की हालत:
रहना: पेड़ की छाया या पहाड़ की खोह में वास।
खाना: खेती नहीं आती थी, इसलिए कन्द-मूल पर गुजारा।
पहनना: कपड़ा बुनना नहीं आता था, इसलिए निर्वस्त्र या छाल और खाल का सहारा।

चरण 3: बाद की हालत:
रहना: मनुष्य घर बनाकर रहने लगा।
खाना: वह खेती करके अनाज उपजाने लगा और उसे आग से पकाकर खाने लगा।
पहनना: वह कपड़े बुनकर पहनने लगा।
आगे चलकर रेलगाड़ी, मोटर, हवाई जहाज और लंबी-चौड़ी सड़कें भी बनीं।

चरण 4: सार:
तालिका से साफ है कि सभ्यता के विकास ने मनुष्य के जीवन को सुविधाजनक बनाया और उसे असभ्यता से बाहर निकाला।

अंतिम उत्तर:
पहले मनुष्य असभ्य अवस्था में, बिना घर, खेती और कपड़े के रहता था। विकास के बाद वह घर, पके भोजन, कपड़ों और आधुनिक साधनों वाला सभ्य जीवन जीने लगा।
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