Comprehension

धूप चमकती है चाँदी की साड़ी पहने

मैके में आई बेटी की तरह मगन है

फूली सरसों से आके लिपट गई है

जैसे दो हमजोली सखियाँ गले मिली हैं

सारंगी बजती है खेतों की गोदी में

दल-के-दल पक्षी उड़ते हैं मीठे स्वर के

अनावरण यह प्राकृत छवि की अमर भारती

रंग-बिरंगी पंखुरियों की खोल चेतना

सौरभ से मह-मह महकाता है दिगंत को

मानव-मन को भर देता है दिव्य दीप्ति से

शिव के नंदी-सा पानी पीता नदिका में

निर्मल नभ अवनी के ऊपर बिसुध खड़ा है

काल काग की तरह ठूँठ पर गुमसुम बैठा

सोई आँखों देख रहा है दिवावसान को।

Question: 1

काव्यांश में धूप को किस रूप में चित्रित किया गया है ?

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दूसरी पंक्ति में लिखा है कि धूप मैके में आई बेटी की तरह मगन है। यही धूप का चित्रण है।
Updated On: Oct 21, 2026
  • चाँदी की साड़ी के रूप में
  • फूली सरसों के रूप में
  • मैके में आई बेटी के रूप में
  • हमजोली सखी के रूप में
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: मानवीकरण को पहचानना:
कवि ने धूप को एक मनुष्य की तरह दिखाया है। इसे मानवीकरण अलंकार कहते हैं। हमें देखना है कि वह किस मनुष्य के रूप में दिखाई गई है।

चरण 2: धूप के लिए प्रयुक्त शब्द:
पहली पंक्ति में धूप ‘साड़ी पहने’ है। दूसरी पंक्ति में वह ‘मैके में आई बेटी की तरह मगन’ है। तीसरी पंक्ति में वह सरसों से ‘लिपट गई’ है।
साड़ी पहनना, मैके आना और मगन होना, ये सब एक बेटी के लिए ही कहे जाते हैं।

चरण 3: भ्रम वाले विकल्प:
‘चाँदी की साड़ी’ पहनावे का वर्णन है, इसलिए विकल्प (1) अधूरा और गलत है। ‘फूली सरसों’ वह है जिससे धूप लिपटती है, इसलिए (2) गलत है। ‘हमजोली सखियाँ’ की उपमा धूप और सरसों के गले मिलने के लिए है, इसलिए (4) मुख्य रूप नहीं है।

चरण 4: निष्कर्ष:
धूप का सीधा रूप ‘मैके में आई बेटी’ है।

अंतिम उत्तर:
धूप को मैके में आई बेटी के रूप में चित्रित किया गया है। सही विकल्प (3) है।
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Question: 2

फूली हुई सरसों से आकर कौन लिपट गई ?

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तीसरी पंक्ति में फूली सरसों से लिपटने वाली धूप है, जिसका वर्णन पहली दो पंक्तियों में है।
Updated On: Oct 21, 2026
  • धूप
  • हवा
  • बेटी
  • चाँदनी
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: क्रिया से कर्ता खोजना:
प्रश्न की क्रिया है ‘लिपट गई’। ‘गई’ स्त्रीलिंग रूप है, इसलिए कर्ता कोई स्त्रीलिंग शब्द होना चाहिए।

चरण 2: विकल्पों को स्त्रीलिंग रूप में परखना:
धूप, बेटी और चाँदनी स्त्रीलिंग शब्द हैं। हवा भी स्त्रीलिंग है। इसलिए केवल व्याकरण से उत्तर पक्का नहीं होता, काव्यांश का अर्थ देखना पड़ेगा।

चरण 3: काव्यांश से पुष्टि:
पहली पंक्ति में ‘धूप चमकती है’ और दूसरी पंक्ति में धूप ही ‘मगन है’। तीसरी पंक्ति में इसी का क्रम आगे चलता है, ‘फूली सरसों से आके लिपट गई है’।
इस पंक्ति में नया कर्ता नहीं आया, इसलिए पिछली पंक्तियों का कर्ता धूप ही चलता है।
‘बेटी’ उपमा में आया शब्द है और ‘चाँदनी’ तथा ‘हवा’ काव्यांश में हैं ही नहीं।

अंतिम उत्तर:
सरसों से लिपटने वाली धूप है। सही विकल्प (1) है।
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Question: 3

खेतों की गोदी में सारंगी बजती है –

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अगली पंक्ति में दल-के-दल पक्षियों के मीठे स्वर की बात है। वही सारंगी जैसी ध्वनि है।
Updated On: Oct 21, 2026
  • खेतों के बीच से गुजरती हवा की ध्वनि की
  • खेतों के ऊपर उड़ते पक्षियों के मीठे स्वरों की
  • पक्षियों को उड़ाने के लिए किसान की बाँसुरी की
  • पक्षियों को बुलाने के लिए छोटे बच्चों की
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: ‘सारंगी’ का प्रतीक समझना:
सारंगी एक वाद्य है जिसका स्वर मधुर और गूँजने वाला होता है। कवि यहाँ किसी असली सारंगी की बात नहीं कर रहा, वह किसी मधुर स्वर की तुलना सारंगी से कर रहा है।

चरण 2: मधुर स्वर का स्रोत ढूँढना:
पूरे काव्यांश में मधुर स्वर का एक ही स्रोत बताया गया है। वह है ‘दल-के-दल पक्षी उड़ते हैं मीठे स्वर के।’
कवि की बात इस प्रकार बनती है: खेतों की गोदी में पक्षियों के मीठे स्वर सारंगी की तरह गूँज रहे हैं।

चरण 3: अन्य विकल्प हटाना:
हवा, किसान की बाँसुरी और बच्चों के स्वर, तीनों काव्यांश में कहीं नहीं आए हैं। जो बात पाठ में है ही नहीं, उसे उत्तर नहीं माना जा सकता, इसलिए (1), (3) और (4) हट जाते हैं।

अंतिम उत्तर:
सारंगी का स्वर पक्षियों के मीठे स्वरों का प्रतीक है। सही विकल्प (2) है।
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Question: 4

ठूँठ पर बैठे काल की तुलना किससे और किस आधार पर की गई है ?

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काल की तुलना काग से की गई है। आधार है ठूँठ पर गुमसुम बैठना और सोई आँखों से देखना।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: उपमा के अंग पहचानना:
उपमा में चार अंग होते हैं: उपमेय, उपमान, समान धर्म और वाचक शब्द। प्रश्न में उपमान और समान धर्म पूछे गए हैं।

चरण 2: अंगों को काव्यांश से निकालना:
उपमेय: काल।
उपमान: काग यानी कौआ।
वाचक शब्द: ‘की तरह’।
समान धर्म: ठूँठ पर गुमसुम बैठना और सोई आँखों से देखना।

चरण 3: भाव समझाना:
शाम का समय है, पक्षी लौट रहे हैं और धूप ढल रही है। ऐसे में काल मानो ठूँठ पर बैठे कौए की तरह शांत, सुस्त और उदास है। वह दिन की समाप्ति को उनींदी आँखों से निहार रहा है।

अंतिम उत्तर:
काल की तुलना कौए से की गई है, क्योंकि दोनों ठूँठ पर चुपचाप बैठकर सोई आँखों से दिन के अंत को देखते जान पड़ते हैं।
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Question: 5

नदी में पड़ते आकाश के प्रतिबिंब के बारे में कवि ने क्या कल्पना की है ? स्पष्ट कीजिए।

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कवि ने निर्मल आकाश को शिव के नंदी की तरह नदी का पानी पीता हुआ और धरती के ऊपर बेसुध खड़ा बताया है।
Updated On: Oct 21, 2026
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चरण 1: दृश्य की कल्पना करना:
शाम के समय नदी का पानी शांत है और उसमें साफ नीला आकाश दिख रहा है। कवि इसी दृश्य को एक जीवित प्राणी के रूप में देखता है।

चरण 2: अलंकार की पहचान:
‘शिव के नंदी-सा’ में ‘सा’ वाचक शब्द है, इसलिए यहाँ उपमा अलंकार है। नंदी उपमान है और आकाश उपमेय है। आकाश को जीवित रूप देने के कारण मानवीकरण भी है।

चरण 3: कल्पना का अर्थ:
नंदी जैसे नदी में मुँह डालकर पानी पीता है, वैसे ही आकाश नदी के जल में उतरा हुआ दिखता है। इस कारण कवि कहता है कि निर्मल आकाश पानी पी रहा है।
पानी पीते समय नंदी बाहरी बातों से बेखबर रहता है। इसी तरह आकाश भी धरती के ऊपर बिसुध खड़ा है, जिसका अर्थ है शांत और स्थिर।

अंतिम उत्तर:
कवि की कल्पना है कि नदी में आकाश का प्रतिबिंब ऐसा दिखता है जैसे शिव का नंदी पानी पी रहा हो, और स्वच्छ आकाश धरती के ऊपर बेसुध खड़ा हो।
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Question: 6

काव्यांश के आधार पर ग्रामीण प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन कीजिए।

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काव्यांश की पंक्तियों से धूप, सरसों, पक्षी, फूल, नदी और आकाश के चित्र छाँटकर लिखिए।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: उत्तर की योजना:
ग्रामीण प्रकृति के सौंदर्य को हम चार बातों में बाँटकर लिखेंगे: रंग और रूप, ध्वनि, गंध और अंत में संध्या का दृश्य। हर बात के साथ काव्यांश की पंक्ति का आधार दिया जाएगा।

चरण 2: रंग और रूप का सौंदर्य:
पहली पंक्ति में धूप चाँदी की साड़ी पहने दिखती है, यानी खेतों पर उजली चमक फैली है। सरसों के पीले फूल खिले हैं और धूप उनसे लिपटी है। कवि ने इसे सखियों के मिलन जैसा बताया है। इस उपमा से प्रकृति में प्रेम और आत्मीयता दिखाई देती है।

चरण 3: ध्वनि और गंध का सौंदर्य:
कवि कहता है कि खेतों की गोदी में सारंगी बजती है। इसका भाव है कि हवा और पक्षियों की आवाज़ से सारा खेत संगीतमय हो उठा है। पक्षियों के दल मीठे स्वर में उड़ते हैं। रंग-बिरंगी पंखुरियों वाले फूल दिगंत तक अपनी महक फैलाते हैं और मानव-मन को आनंद देते हैं।

चरण 4: संध्या का शांत दृश्य:
नदी के किनारे शांत वातावरण है। निर्मल आकाश धरती के ऊपर चुपचाप टिका है। दिन ढलने पर समय ठूँठ पर बैठे कौए की तरह गुमसुम होकर दिन का अंत देखता है। इससे गाँव की शाम की शांति का भाव मिलता है।

अंतिम उत्तर:
कवि ने धूप, सरसों, पक्षी, फूल, नदी और आकाश के चित्रों से ग्रामीण प्रकृति को सुंदर, संगीतमय, सुगंधित और शांत रूप में प्रस्तुत किया है।
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