Comprehension

अकेलेपन से जो लोग दुखी हैं,

वृत्तियाँ उनकी

निश्चय ही, बहिर्मुखी हैं।

सृष्टि से बाँधने वाला तार

उनका टूट गया है;

असली आनन्द का आधार

छूट गया है।

उद्गम से छूटी हुई नदियों में ज्वार कहाँ ?

जड़-कटे पौधों में जीवन की धार कहाँ ?

तब भी, जड़-कटे पौधों के ही समान

रोते हैं ये उखड़े हुए लोग बेचारे;

जीना चाहते हैं भीड़-भम्भड़ के सहारे।

भीड़, मगर, टूटा हुआ तार

और तोड़ती है

कटे हुए पौधों की

जड़ नहीं जोड़ती है।

बाहरी तरंगों पर जितना ही फूलते हैं;

हम अपने को उतना ही और भूलते हैं।

जड़ जमाना चाहते हो

तो एकान्त में जाओ;

अगम-अज्ञात में अपनी सोरें फैलाओ।

अकेलापन है राह

अपने आपको पाने की;

जहाँ से तुम निकल चुके हो,

उस घर में वापस जाने की।

Question: 1

वृत्तियाँ उनकी, निश्चय ही बहिर्मुखी हैं – पंक्ति के संदर्भ में ‘वृत्ति’ का अर्थ है –

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'बहिर्मुखी' विशेषण किस चीज़ के लिए प्रयोग होता है, यह सोचिए।
  • व्यापार
  • स्वभाव
  • कर्त्तव्य
  • वृत्तांत
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: विशेषण से अर्थ पहचानना:
पंक्ति में 'वृत्तियाँ' के साथ 'बहिर्मुखी' विशेषण आया है।
बहिर्मुखी और अंतर्मुखी शब्द सदा मनुष्य के स्वभाव के लिए प्रयोग होते हैं, जैसे - 'वह बहिर्मुखी स्वभाव का है।'
इसलिए यहाँ 'वृत्ति' भी स्वभाव के अर्थ में है।

चरण 2: कविता के भाव से पुष्टि:
कवि बताता है कि ऐसे लोग भीड़-भम्भड़ के सहारे जीना चाहते हैं, यानी उनका मन बाहर की ओर भागता है।
यह उनकी आदत और मन की प्रकृति है, जो 'स्वभाव' शब्द से ही ठीक व्यक्त होती है।

चरण 3: उन्मूलन:
'बहिर्मुखी व्यापार', 'बहिर्मुखी कर्त्तव्य' या 'बहिर्मुखी वृत्तांत' जैसे प्रयोग अर्थहीन लगते हैं, इसलिए विकल्प 1, 3 और 4 हटते हैं।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प 2 है - स्वभाव।
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Question: 2

‘उद्गम से छूटी हुई नदियों में ज्वार कहाँ ?’ – पंक्ति से अभिप्राय है –

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नदी यहाँ प्रतीक है, सोचिए कि कवि मूल से कटे मनुष्य के बारे में क्या कहना चाहता है।
  • मूल से अलग होने पर नदियों में प्रवाह नहीं रहता।
  • मूल से अलग होने पर नदियों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
  • उद्गम स्थल से अलग होने पर नदियों में सौंदर्य नहीं रहता।
  • मूल से अलग होने पर जीवन का सौंदर्य नहीं रहता।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: कविता का केंद्रीय भाव:
पूरी कविता मनुष्य के बारे में है - भीड़ में खोए, अपने मूल से उखड़े लोगों के बारे में।
कवि का संदेश है कि अकेलापन अपने आपको पाने और अपने मूल घर में लौटने की राह है।

चरण 2: नदी वाली पंक्ति की भूमिका:
नदी यहाँ एक उपमा है, कविता का विषय नहीं।
कवि कहना चाहता है कि जो मनुष्य अपने मूल - अपनी अंतरात्मा और सृष्टि - से कट जाता है, उसके जीवन से उमंग, आनंद और सुंदरता चली जाती है।
इसीलिए 'ज्वार' यहाँ जीवन की उमंग का प्रतीक है।

चरण 3: उन्मूलन:
नदी के प्रवाह, अस्तित्व या सौंदर्य वाले विकल्प (1, 2, 3) पंक्ति को केवल नदी तक सीमित कर देते हैं, इसलिए वे कविता के भाव से मेल नहीं खाते।
केवल विकल्प 4 मनुष्य के जीवन से जुड़ा अभिप्राय देता है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प 4 है - मूल से अलग होने पर जीवन का सौंदर्य नहीं रहता।
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Question: 3

भीड़ का क्या स्वभाव है ?

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'भीड़, मगर, टूटा हुआ तार और तोड़ती है' पंक्ति का अर्थ सोचिए।
  • लोगों की आलोचना करना
  • पौधों को जड़ से काटना
  • दुखी को और दुखी करना
  • दूसरों का उपहास करना
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: लोगों की अपेक्षा:
कवि बताता है कि उखड़े हुए लोग 'जीना चाहते हैं भीड़-भम्भड़ के सहारे', अर्थात वे भीड़ से सुख की आशा करते हैं।

चरण 2: भीड़ का वास्तविक प्रभाव:
कवि तुरंत 'मगर' शब्द से बताता है कि उनकी आशा झूठी है - भीड़ 'टूटा हुआ तार और तोड़ती है'।
'टूटा तार' उनके दुखी मन का प्रतीक है, और उसे और तोड़ना उन्हें और दुखी करना है।
इस प्रकार भीड़ का स्वभाव दुखी व्यक्ति के दुख को बढ़ाना है।

चरण 3: उन्मूलन:
आलोचना और उपहास (विकल्प 1 और 4) कविता से बाहर की बातें हैं।
जड़ काटना (विकल्प 2) कविता का अर्थ उलट देता है, क्योंकि जड़ें पहले से कटी हुई हैं।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प 3 है - दुखी को और दुखी करना।
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Question: 4

‘बाहरी तरंगों पर जितना ही फूलते हैं’ – पंक्ति में ‘बाहरी तरंग’ से आशय है –

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'बाहरी' शब्द एकांत के विपरीत संसार की चमक-दमक की ओर संकेत करता है।
  • सांसारिक माया
  • सागर की लहरें
  • दूसरों का सहारा
  • भौतिक साधन
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: विरोधी भाव से अर्थ समझना:
कविता में दो दिशाएँ हैं - 'बाहर' और 'भीतर'।
भीतर की दिशा है एकांत और अपने आपको पाना, जबकि बाहर की दिशा है भीड़ और संसार का आकर्षण।
'बाहरी तरंगें' इसी बाहर वाले संसार की हलचल हैं।

चरण 2: 'फूलना' शब्द से संकेत:
'फूलना' का अर्थ है इतराना या प्रसन्न होना।
मनुष्य संसार के मोह और दिखावे में इतराता है और अपने आप को भूल जाता है, यह माया का ही स्वभाव है।

चरण 3: उन्मूलन:
'सागर की लहरें' शाब्दिक अर्थ होने से हटता है।
'दूसरों का सहारा' और 'भौतिक साधन' संकुचित अर्थ हैं, जबकि 'तरंगें' पूरे सांसारिक आकर्षण को दर्शाती हैं।
अतः 'सांसारिक माया' सबसे उपयुक्त है।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प 1 है - सांसारिक माया।
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Question: 5

‘जड़ जमाना चाहते हो, तो एकान्त में जाओ’ – इन पंक्तियों में ‘जड़ जमाना’ से अभिप्राय है –

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कविता की अंतिम पंक्ति 'अकेलापन है राह अपने आपको पाने की' से जोड़कर सोचिए।
  • अपने आप को पहचानना
  • अपने पाँव जमाना
  • अपना वर्चस्व स्थापित करना
  • बस जाना
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: एकांत और जड़ का संबंध:
कवि कहता है कि जड़ जमानी हो तो एकांत में जाना होगा।
एकांत में मनुष्य न व्यापार करता है, न दूसरों पर अधिकार जमाता है, वह केवल अपने भीतर झाँकता है।
इसलिए यहाँ 'जड़ जमाना' भीतरी काम है, बाहरी नहीं।

चरण 2: अंतिम पंक्तियों से पुष्टि:
कविता का अंत है - 'अकेलापन है राह अपने आपको पाने की; जहाँ से तुम निकल चुके हो, उस घर में वापस जाने की।'
यह स्पष्ट करता है कि एकांत में जड़ जमाने का फल 'अपने आपको पाना' अर्थात स्वयं को पहचानना है।

चरण 3: उन्मूलन:
पाँव जमाना, वर्चस्व स्थापित करना और बस जाना - तीनों बाहरी सफलता या स्थान से जुड़े हैं, इसलिए विकल्प 2, 3 और 4 हटते हैं।

अंतिम उत्तर:
सही विकल्प 1 है - अपने आप को पहचानना।
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