Comprehension

प्रकृति के कई रंग हैं और उन रंगों में कोई होड़ नहीं है। रंगों की इस विशाल दुनिया में हम भी तो एक रंग ही हैं। पर हमारे साथ दिक्कत है। एक तो हमें अपने रंगों का पता नहीं है। दूसरा, हम दूसरों के रंगों से डरते हैं। हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है। दूसरे के जैसा होने की या उन्हें अपने जैसा करने की हमारी कोशिशों का कोई बहुत अर्थ भी नहीं है। कारण जबर्दस्ती चढ़ाए गए रंग देर तक टिकते ही नहीं है। सबको एक ही रंग में रंगने की कोशिश से बेहतर है कि हम एक-दूसरे को अपना सहयोग दें। दो रंग जुड़ते हैं तो एक नया ही रंग बन जाता है। इसी तरह आपस के साथ से हम भी कुछ नए रंग जिंदगी में जोड़ सकते हैं।

सुख सतरंगी है तो दुख के भी कई रंग हैं। फिर, सफेद और काले रंग के भी कई प्रतिरूप होते हैं। गायिका एमी ग्रांट कहती हैं, ‘काले रंग के बिना किसी भी रंग को गहराई नहीं मिलती।’ बात केवल परछाईं की नहीं है, पूर्णता की है। ज्यादातर लोग निराशा, अकेलापन, चुनौती, डर और उदासी के रंगों से दूर भागते हैं। वे जीवन में मुश्किल समय आते ही बेचैन हो उठते हैं जबकि मनुष्य की विकास यात्रा यही कहती है कि दुख, दर्द, कड़ी मेहनत, धैर्य और चुनौतियों के रंगों से मिलकर ही हमें जीत की चमक मिलती है। लेखक रे विलियम्स का मानना है कि बड़ी बारीकी से हम अपने दिमाग की नकारात्मक घेरबंदी करते चले जाते हैं, जो है उसके बारे में ध्यान नहीं देते, अभावों के विषय में सोचते चले जाते हैं और जीवन को जटिल बना लेते हैं।

प्रकृति हर दिन होली खेलती है, एक ही दिन में कई रंग बदलती है। दुख-दर्द का कोई रंग स्थायी नहीं होता। हमारी दुनिया रंगीन हो जाती है जब हम अपने रंगों से संतुष्ट हो जाते हैं और दूसरों का देखकर खुश होते हैं।

Question: 1

‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ – से अभिप्राय है –

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'रंग' यहाँ व्यक्ति की अपनी पहचान और गुणों का प्रतीक है।
Updated On: Oct 31, 2026
  • अपने स्वभाव का ज्ञान नहीं है।
  • जीवन की विविधता का ज्ञान नहीं है।
  • अपनी विशेषताओं का ज्ञान नहीं है।
  • अपनी परंपराओं का ज्ञान नहीं है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्पों को एक-एक करके हटाएँ:
'परंपराओं' की बात गद्यांश में कहीं नहीं है, इसलिए विकल्प 4 गलत है।
'जीवन की विविधता' के लिए लेखक ने अलग वाक्य 'हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है' लिखा है, इसलिए विकल्प 2 इस पंक्ति का अर्थ नहीं है।

चरण 2: स्वभाव और विशेषता में अंतर:
स्वभाव व्यक्ति के व्यवहार का एक अंग मात्र है।
लेखक 'हम भी तो एक रंग ही हैं' कहकर व्यक्ति की पूरी पहचान और उसके गुणों की ओर संकेत करता है।
इसलिए विकल्प 1 अधूरा है।

चरण 3: अंतिम पंक्ति से पुष्टि:
गद्यांश के अंत में कहा गया है - 'हमारी दुनिया रंगीन हो जाती है जब हम अपने रंगों से संतुष्ट हो जाते हैं।'
अपने गुणों और विशेषताओं से संतुष्ट होना तभी संभव है जब हम उन्हें पहचानें।
इससे स्पष्ट है कि 'अपने रंग' का अर्थ 'अपनी विशेषताएँ' है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (3) - अपनी विशेषताओं का ज्ञान नहीं है।
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Question: 2

‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ – पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है –

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गद्यांश की पंक्ति 'सुख सतरंगी है तो दुख के भी कई रंग हैं' पर ध्यान दीजिए।
Updated On: Oct 31, 2026
  • जीवन का रंग-बिरंगा होना
  • जीवन में दुख-तकलीफ का होना
  • जीवन में सुख-दुख का होना
  • जीवन का बहुत विशाल होना
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: शब्द का अर्थ:
'बहुरंगी' शब्द 'बहु' और 'रंगी' से बना है, अर्थात अनेक रंगों वाला।
गद्यांश में रंग भावनाओं और परिस्थितियों के प्रतीक हैं, कपड़े या चित्र के रंग नहीं।

चरण 2: अनुपयुक्त विकल्प हटाएँ:
'जीवन का बहुत विशाल होना' आकार की बात है, इसलिए विकल्प 4 गलत है।
'केवल दुख-तकलीफ' एकतरफा अर्थ है, इसलिए विकल्प 2 गलत है।
'रंग-बिरंगा होना' शब्द का सीधा अर्थ है, पंक्ति का भाव नहीं, इसलिए विकल्प 1 भी उपयुक्त नहीं।

चरण 3: उचित विकल्प की पुष्टि:
लेखक बताता है कि लोग निराशा, अकेलापन, डर और उदासी के रंगों से भागते हैं, जबकि सुख के भी अनेक रंग हैं।
'दुख-दर्द का कोई रंग स्थायी नहीं होता' - यह पंक्ति भी सुख-दुख के आने-जाने की ओर संकेत करती है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (3) - जीवन में सुख-दुख का होना।
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Question: 3

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

कथन : प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।

कारण : प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।

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पहले दोनों को अलग-अलग गद्यांश से मिलाइए, फिर देखिए कि कारण कथन को समझाता है या नहीं।
Updated On: Oct 31, 2026
  • कारण सही है किंतु कथन गलत है।
  • कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्प 1 और 2 हटाएँ:
कथन गद्यांश की पहली पंक्ति से शब्दशः मेल खाता है, इसलिए वह गलत नहीं हो सकता।
इस आधार पर विकल्प 1 (कथन गलत) और विकल्प 2 (दोनों गलत) दोनों हट जाते हैं।

चरण 2: कारण का स्रोत:
कारण अंतिम अनुच्छेद की पंक्ति 'एक ही दिन में कई रंग बदलती है' पर आधारित है, इसलिए वह भी सही है।
अब केवल विकल्प 3 और 4 बचते हैं।

चरण 3: 'क्यों' प्रश्न से परखें:
प्रश्न पूछें - 'प्रकृति के रंगों में होड़ क्यों नहीं है?'
इसका उत्तर 'क्योंकि वह दिन में कई रंग बदलती है' नहीं बनता।
दोनों बातें गद्यांश में अलग-अलग संदर्भों में कही गई हैं, अतः कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है और विकल्प 4 गलत है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (3) - कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
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Question: 4

प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?

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गद्यांश की पहली पंक्ति (होड़ नहीं) और अंतिम पंक्ति (अपने रंगों से संतुष्ट) को जोड़िए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
प्रश्न पूछता है कि प्रकृति का उदाहरण देकर लेखक मनुष्य को क्या सिखाना चाहता है।
इसके लिए गद्यांश की पहली और अंतिम पंक्तियाँ सबसे उपयोगी हैं।

चरण 2: पंक्तियों से निष्कर्ष:
पहली पंक्ति - 'उन रंगों में कोई होड़ नहीं है' - सहअस्तित्व और प्रतिस्पर्धा-रहित जीवन का संकेत देती है।
अंतिम पंक्ति - 'हमारी दुनिया रंगीन हो जाती है जब हम अपने रंगों से संतुष्ट हो जाते हैं और दूसरों का देखकर खुश होते हैं' - संतोष और दूसरों की खुशी में खुश होने की सीख देती है।

चरण 3: उत्तर को जोड़ें:
इन दोनों बातों को मिलाने पर स्पष्ट होता है कि लेखक मनुष्य को प्रकृति की तरह सहज, संतुष्ट और सहयोगी बनने को कहता है।
बदलते रंगों के माध्यम से वह यह भी बताता है कि कठिन समय भी बीत जाता है।

अंतिम उत्तर:
प्रकृति की तरह बिना होड़ के, अपने गुणों से संतुष्ट रहकर, दूसरों की विशेषताओं को देखकर प्रसन्न होना और कठिन समय को अस्थायी मानकर धैर्य रखना ही लेखक का संदेश है।
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Question: 5

रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?

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दूसरे अनुच्छेद की अंतिम पंक्ति में रे विलियम्स का विचार दिया गया है।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का केंद्र:
प्रश्न में 'जटिलता का कारण' पूछा गया है और उसका स्रोत लेखक रे विलियम्स का विचार है।
यह विचार दूसरे अनुच्छेद के अंत में दिया गया है।

चरण 2: अपने शब्दों में व्याख्या:
मनुष्य की आदत है कि वह उपलब्धियों को भूलकर कमियों को गिनता रहता है।
जब मन लगातार 'क्या नहीं मिला' सोचता है तो निराशा और असंतोष बढ़ता है।
लेखक इसे 'दिमाग की नकारात्मक घेरबंदी' कहता है, यानी मन चारों ओर से नकारात्मक विचारों में बंद हो जाता है।

चरण 3: परिणाम:
ऐसी सोच से व्यक्ति छोटी कठिनाई में भी बेचैन हो जाता है और जीवन उलझा हुआ लगने लगता है।

अंतिम उत्तर:
नकारात्मक सोच से मन को घेर लेना, उपलब्ध चीज़ों की उपेक्षा करना और लगातार अभावों पर सोचते रहना ही, रे विलियम्स के अनुसार, जीवन को जटिल बना देता है।
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Question: 6

‘दो रंग जुड़ते हैं तो एक नया ही रंग बन जाता है’ – पंक्ति का क्या आशय है ?

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इस पंक्ति से ठीक पहले और बाद में 'सहयोग' और 'आपस के साथ' की बात कही गई है।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: उदाहरण से समझें:
पीला और नीला रंग मिलकर हरा रंग बनाते हैं, जो दोनों से अलग और नया होता है।
लेखक इसी साधारण अनुभव को मनुष्य के संबंधों पर लागू करता है।

चरण 2: मनुष्य पर लागू करें:
हर व्यक्ति एक 'रंग' है, उसकी अपनी विशेषताएँ हैं।
लेखक के अनुसार दूसरे जैसा बनने या दूसरे को अपने जैसा बनाने की कोशिश व्यर्थ है, क्योंकि 'जबर्दस्ती चढ़ाए गए रंग देर तक टिकते ही नहीं।'
सही मार्ग यह है कि अपनी पहचान बनाए रखते हुए दूसरों के साथ मिलकर काम किया जाए।

चरण 3: संदेश:
सहयोग से दोनों के गुण मिलकर एक नई शक्ति और नया सौंदर्य पैदा करते हैं।
परिवार, मित्रता और समाज सभी इसी मेल से समृद्ध होते हैं।

अंतिम उत्तर:
पंक्ति का आशय है कि भिन्न लोगों के आपसी सहयोग और मेल से जीवन में नई विशेषता और नया आनंद उत्पन्न होता है, इसलिए विविधता का सम्मान कर साथ मिलकर चलना चाहिए।
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Question: 7

‘प्रकृति हर दिन होली खेलती है’ – से क्या अभिप्राय है ? इसके माध्यम से क्या संदेश दिया गया है ?

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इस पंक्ति के ठीक बाद वाला वाक्य 'दुख-दर्द का कोई रंग स्थायी नहीं होता' संदेश बताता है।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न के दो भाग:
पहले भाग में पंक्ति का अर्थ पूछा गया है और दूसरे भाग में उससे मिलने वाला संदेश।
दोनों का उत्तर गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद में है।

चरण 2: पहला भाग - अर्थ:
प्रकृति रोज़ अनेक रूप बदलती है - भोर की लालिमा, दिन का उजाला, संध्या का सुनहरापन और रात का अँधेरा।
रंगों के इस निरंतर बदलाव को लेखक ने 'होली खेलना' कहा है।
यह मानवीकरण है, जिसमें प्रकृति को मनुष्य की तरह उत्सव मनाते दिखाया गया है।

चरण 3: दूसरा भाग - संदेश:
लेखक तुरंत जोड़ता है कि 'दुख-दर्द का कोई रंग स्थायी नहीं होता।'
इससे सीख मिलती है कि मुश्किल समय भी बीत जाता है; हमें निराशा से भागने के बजाय धैर्य रखना चाहिए।
साथ ही अपने गुणों से संतुष्ट रहकर दूसरों की प्रसन्नता में भी आनंद लेना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
प्रकृति प्रतिदिन अपने रंग बदलकर मानो होली खेलती है; इससे संदेश मिलता है कि जीवन में परिवर्तन निश्चित है, दुख अस्थायी है, इसलिए धैर्य, संतोष और प्रसन्नता से जीवन जीना चाहिए।
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