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‘पहलवान की ढोलक’ कहानी व्यवस्था बदलने के साथ लोक–कला और उससे जुड़े कलाकारों के उपेक्षित हो जाने की कहानी है। सिद्ध कीजिए।

Show Hint

लोककला को जीवित रखने के लिए केवल संरक्षण नहीं, बल्कि सक्रिय सामाजिक भागीदारी ज़रूरी है।
Updated On: Aug 10, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

‘पहलवान की ढोलक’ कहानी दर्शाती है कि समय के साथ सामाजिक बदलावों ने लोक कला और कलाकारों को कैसे हाशिए पर धकेल दिया।
कभी उत्सवों की शोभा बढ़ाने वाले ढोलक और लोकनृत्य अब उपेक्षित हैं। कलाकारों को धन, मंच और सम्मान नहीं मिलता। टीवी, मोबाइल और इंटरनेट जैसे नए मनोरंजन के साधनों ने लोक कला को महत्वहीन बना दिया है।
यह कहानी एक कलाकार की पीड़ा और हमारी सांस्कृतिक विरासत की दुर्दशा को दर्शाती है।
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