Step 1: किरालता का अर्थ समझना।
कोई अणु किराल (chiral) तभी होता है जब उसकी दर्पण छवि (mirror image) उस पर अध्यारोपित न हो। इसकी सरल कसौटी है कि अणु में कोई भी सममिति तत्व जैसे सममिति तल या सममिति केंद्र न हो।
Step 2: अणु की संरचना।
यहाँ 2,5-डाइमेथिल-1,4-डाइऑक्सेन वलय के दो मेथिल समूहों की त्रिविम व्यवस्था (cis या trans) के आधार पर किरालता तय होगी।
Step 3: ट्रांस विन्यास की जाँच।
आरेख (a) में एक मेथिल वेज (wedge) पर और दूसरा डैश (dash) पर है, यानी trans रूप। इस व्यवस्था में अणु के केंद्र पर एक सममिति केंद्र (centre of inversion) मौजूद रहता है।
Step 4: ट्रांस अणु अकिराल है।
सममिति केंद्र की उपस्थिति के कारण आरेख (a) की दर्पण छवि उसी पर बैठ जाती है, इसलिए यह अकिराल है।
Step 5: सिस विन्यास की जाँच।
आरेख (b) में दोनों मेथिल समूह एक ही ओर (cis) हैं। इस अणु में न सममिति तल है, न सममिति केंद्र, इसलिए इसकी दर्पण छवि अलग रहती है।
Step 6: निष्कर्ष।
केवल आरेख (b) में सभी सममिति तत्व अनुपस्थित हैं, इसलिए वही किराल अणु है।
\[ \boxed{\text{आरेख (b)}} \]