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नेताजी ने भाषण दिया था। (कर्मवाच्य में बदलिए) 
 

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कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलते समय, कर्ता के बाद 'द्वारा' लगाएँ और क्रिया को 'गया/गई/गए' के रूप में बदलें जो कर्म के अनुसार हो।
Updated On: Mar 7, 2026
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Solution and Explanation

नेताजी ने भाषण दिया था। (कर्मवाच्य में बदलिए)

1. कर्मवाच्य वाक्य:
भाषण नेताजी द्वारा दिया गया था।

2. कर्मवाच्य वाक्य का विस्तार:
इस वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित करने का मतलब है कि हम वाक्य के कर्ता (नेताजी) को गौण कर देंगे और क्रिया के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसमें यह बताया जाता है कि भाषण दिया गया था, लेकिन इसे देने वाले नेताजी का उल्लेख अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। कर्मवाच्य वाक्य में क्रिया का कार्य मुख्य होता है, और कर्ता का नाम केवल 'द्वारा' के साथ जोड़कर दिया जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह क्रिया करने वाला व्यक्ति कौन था।

3. कर्मवाच्य और कर्तावाच्य में अंतर:
- कर्तावाच्य वाक्य: इस वाक्य में कर्ता का उल्लेख प्रमुख होता है, और क्रिया का कार्य कर्ता द्वारा किया जाता है। जैसे: 'नेताजी ने भाषण दिया था।'
- कर्मवाच्य वाक्य: इस वाक्य में क्रिया का मुख्य ध्यान होता है, और कर्ता का उल्लेख गौण किया जाता है। जैसे: 'भाषण नेताजी द्वारा दिया गया था।'

4. कर्मवाच्य वाक्य की रचना:
कर्मवाच्य वाक्य रचते समय यह ध्यान रखा जाता है कि मुख्य क्रिया को उस रूप में प्रस्तुत किया जाए जो किसी कार्य को करने के बारे में बताता है, न कि उस व्यक्ति के बारे में जो वह कार्य कर रहा है। इस वाक्य में 'नेताजी' का नाम अंतिम में आता है और वह केवल क्रिया के द्वाराकर्ता के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, 'दिया गया' शब्द क्रिया का कर्मवाच्य रूप है, जो दर्शाता है कि क्रिया को कैसे और कब किया गया था।

5. निष्कर्ष:
इस प्रकार, 'नेताजी ने भाषण दिया था' वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित करने से वाक्य का मतलब वही रहता है, लेकिन हम मुख्य रूप से कार्य (भाषण देना) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, न कि उस व्यक्ति (नेताजी) पर जिसने यह कार्य किया। कर्मवाच्य वाक्य का उपयोग उस समय किया जाता है जब हम कार्य के निष्पादन पर अधिक जोर देना चाहते हैं और कर्ता को गौण करना चाहते हैं। यह रूप साहित्यिक और औपचारिक लेखन में अधिक प्रचलित है।

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