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'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को क्या देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ और उन्होंने उसके लिए क्या किया? 
 

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'दुर्दमनीय कौतूहल' का अर्थ है ऐसी जिज्ञासा जिसे दबाया न जा सके। उत्तर में इस भाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Updated On: Mar 7, 2026
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Solution and Explanation

'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को क्या देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ और उन्होंने उसके लिए क्या किया? 
 

1. हालदार साहब का कौतूहल:
'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को नेताजी का चश्मा देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ। जब उन्होंने नेताजी को चश्मा पहने देखा, तो उनकी आँखों में एक गहरी जिज्ञासा और अचंभा था। चश्मे की खासियत ने उनके मन में अजीब सवाल उठाए, और वे यह समझने के लिए उत्सुक हो गए कि आखिर चश्मा क्यों और कैसे इतना महत्वपूर्ण है। यह कौतूहल उनके अंदर एक चिंगारी की तरह फूट पड़ा।

2. हालदार साहब की प्रतिक्रिया:
हालदार साहब का यह कौतूहल उनके व्यवहार और क्रियाओं से स्पष्ट होता है। उन्होंने चश्मे के बारे में और अधिक जानने के लिए नेताजी से सवाल पूछने शुरू किए और यह जानने के लिए उत्सुक हो गए कि यह चश्मा कैसे काम करता है। उनका यह क्रियाकलाप इस बात को दिखाता है कि वे किसी वस्तु के महत्व को समझने के लिए कितने जिज्ञासु थे।

3. निष्कर्ष:
इस प्रकार, नेताजी का चश्मा देखकर हालदार साहब को एक अत्यधिक जिज्ञासा (दुर्दमनीय कौतूहल) का अनुभव हुआ। उन्होंने अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए चश्मे के बारे में जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किए। यह घटना उनके भीतर के गहरे उत्सुकता और खोजने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

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