Question:hard

Mn2(CO)10 एवं [MnO4]− में, धातु-लिगन्ड $\pi$-आबंध बनने के लिए धातु एवम् लिगन्ड के बीच इलेक्ट्रॉन युगल का दान आवश्यक होता है। निम्न में से कौन सा विकल्प इलेक्ट्रॉन युगल दान की दिशा को सही से दर्शाता है?

Show Hint

याद रखें कि कम ऑक्सीकरण अवस्था वाले धातु कार्बोनिल हमेशा पश्च-आबंधन (धातु \(\rightarrow\) लिगेंड) दर्शाते हैं, जबकि उच्च ऑक्सीकरण अवस्था वाले ऑक्सो-ऋणायन हमेशा लिगेंड-टू-मेटल (लिगेंड \(\rightarrow\) धातु) आबंधन दर्शाते हैं।
Updated On: Jun 11, 2026
  • Mn2(CO)10: धातु कक्षक $\rightarrow$ लिगन्ड कक्षक; [MnO4]−: लिगन्ड कक्षक $\rightarrow$ धातु कक्षक
  • Mn2(CO)10: लिगन्ड कक्षक $\rightarrow$ धातु कक्षक; [MnO4]−: लिगन्ड कक्षक $\rightarrow$ धातु कक्षक
  • Mn2(CO)10: धातु कक्षक $\rightarrow$ लिगन्ड कक्षक; [MnO4]−: धातु कक्षक $\rightarrow$ लिगन्ड कक्षक
  • Mn2(CO)10: लिगन्ड कक्षक $\rightarrow$ धातु कक्षक; [MnO4]−: धातु कक्षक $\rightarrow$ लिगन्ड कक्षक
Show Solution

The Correct Option is A

Solution and Explanation

Step 1: प्रश्न को समझना।
$Mn_2(CO)_{10}$ और $[MnO_4]^-$ में धातु-लिगेंड $\pi$-आबंध बनने के दौरान इलेक्ट्रॉन युगल दान की दिशा बतानी है।
Step 2: $Mn_2(CO)_{10}$ की प्रकृति।
यह एक धातु कार्बोनिल है जिसमें सहक्रियात्मक आबंधन (synergic bonding) होता है।
Step 3: कार्बोनिल में पश्च-बंधन।
धातु के भरे $d$-कक्षक अपने इलेक्ट्रॉन युग्म को CO के रिक्त $\pi^*$ कक्षकों में देते हैं (back-bonding), अतः दिशा धातु $\rightarrow$ लिगन्ड।
Step 4: $[MnO_4]^-$ की स्थिति।
यहाँ Mn अपनी उच्चतम +7 अवस्था में है और $d^0$ विन्यास रखता है, अतः धातु के पास देने योग्य $d$-इलेक्ट्रॉन नहीं।
Step 5: परमैंगनेट में दान की दिशा।
ऑक्सीजन के भरे $p$-कक्षक अपने इलेक्ट्रॉन रिक्त Mn $d$-कक्षकों में देते हैं (LMCT), अतः दिशा लिगन्ड $\rightarrow$ धातु।
Step 6: निष्कर्ष।
अतः कार्बोनिल में धातु$\rightarrow$लिगन्ड और परमैंगनेट में लिगन्ड$\rightarrow$धातु।
\[ \boxed{\text{Mn2(CO)10: धातु कक्षक → लिगन्ड कक्षक; [MnO4]−: लिगन्ड कक्षक → धातु कक्षक}} \]
Was this answer helpful?
0