Comprehension

मैय्या हौं न चरैहौं गाइ। 
सिगरे ग्वाल घिरावत मोसों, मेरे पाइ पिराइ। 
जौ न पत्याहि पूँछि बलदाउहिं, अपनी सौंह दिवाइ। 
यह सुनि माइ जसोदा ग्वालिनि, गारी देति रिसाइ। 
मैं पठवति अपने लरिका कौं, आवै मन बहराइ। 
सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ। 
 

Question: 1

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Show Hint

पद्यांश के अंत में अक्सर कवि का नाम (जैसे 'सूर') लिखा होता है, जिससे पहचान आसान हो जाती है।
Updated On: Feb 19, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश भक्तिकालीन कृष्णभक्ति धारा के महान कवि सूरदास द्वारा रचित है।
यह पद उनकी प्रसिद्ध काव्य कृति ‘सूरसागर’ से लिया गया है।
इस पद में बालकृष्ण की बाल-लीलाओं का अत्यंत मनोहर और भावपूर्ण चित्रण किया गया है।

इस प्रसंग में बालकृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि वे अब गाय चराने नहीं जाएँगे, क्योंकि अन्य ग्वालबाल उन्हें घेर लेते हैं और उनके पैर दुखने लगते हैं।
वे अपने बड़े भाई बलराम का नाम लेकर अपनी बात की सच्चाई सिद्ध करने का प्रयास करते हैं।
माता यशोदा यह सुनकर क्रोधित हो जाती हैं और ग्वालिनों को डाँटती हैं।

कवि ने इस पद में बालकृष्ण की चंचलता, मासूमियत और वात्सल्य भाव का अत्यंत सजीव चित्रण किया है।
माता और पुत्र के स्नेहपूर्ण संबंध को अत्यंत सरस और मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

निष्कर्ष: अतः यह पद्यांश सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है, जिसमें बालकृष्ण की बाल-लीला और वात्सल्य भाव का सुंदर चित्रण किया गया है।
Was this answer helpful?
0
Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: सिगरे ग्वाल घिरावत मोसों, मेरे पाइ पिराइ। सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ।)

Show Hint

'पाइ पिराइ' का अर्थ है पैरों का दर्द करना। ब्रजभाषा के इन शब्दों का सटीक अर्थ व्याख्या को प्रभावी बनाता है।
Updated On: Feb 19, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

विश्लेषण: प्रस्तुत पद्यांश भक्त कवि सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें बालक कृष्ण की बाल-सुलभ चेष्टाओं का अत्यंत मनोहर चित्रण किया गया है।
इसमें कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि वे गाय चराने नहीं जाएँगे।

रेखांकित पंक्ति — “सिगरे ग्वाल घिरावत मोसों, मेरे पाइ पिराइ।” — में कृष्ण कहते हैं कि सभी ग्वाल-बाल उन्हें चारों ओर से घेर लेते हैं, जिससे उनके पैरों में पीड़ा होती है।
यहाँ बालक कृष्ण की मासूमियत और शिकायत भरा स्वर प्रकट होता है।
वे अपनी असहजता और कष्ट को बढ़ा-चढ़ाकर माँ के सामने व्यक्त कर रहे हैं, ताकि वे उन्हें गाय चराने न भेजें।

दूसरी पंक्ति — “सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ।” — में यशोदा कहती हैं कि मेरा श्याम (कृष्ण) तो बहुत छोटा बालक है, फिर भी ग्वाल-बाल उसे गिराकर मारते हैं।
यहाँ मातृ-स्नेह की गहन भावना व्यक्त हुई है।
यशोदा अपने पुत्र के प्रति अत्यधिक स्नेह और संरक्षण की भावना रखती हैं तथा दूसरों पर क्रोधित हो उठती हैं।

इन पंक्तियों में बाल-कृष्ण की चंचलता, सरलता और मातृ-स्नेह का अत्यंत कोमल एवं सजीव चित्रण हुआ है।
भाषा ब्रजभाषा की मधुरता से परिपूर्ण है और भाव अत्यंत मार्मिक एवं सरस हैं।

निष्कर्ष: रेखांकित अंश में बालक कृष्ण की शिकायत भरी सरल वाणी तथा माता यशोदा के वात्सल्य भाव का सुंदर और हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है।
Was this answer helpful?
0
Question: 3

बाल कृष्ण गाय चराने क्यों नहीं जाना चाहते हैं?

Show Hint

उत्तर में 'पाइ पिराइ' और 'रिंगाइ' (दौड़ाना) शब्दों का उल्लेख करना प्रभावी रहता है।
Updated On: Feb 19, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

विश्लेषण: प्रस्तुत पद में बाल कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि वे गाय चराने नहीं जाएंगे।
वे बताते हैं कि सभी ग्वालबाल उन्हें चारों ओर से घेर लेते हैं और उनके पैरों में पीड़ा हो जाती है।
“मेरे पाइ पिराइ” से स्पष्ट है कि उनके कोमल चरणों में दर्द होता है, इसलिए वे वहाँ जाने से कतराते हैं।

कृष्ण यह भी कहते हैं कि यदि माता को विश्वास न हो तो वे बलराम से पूछ सकती हैं।
इससे यह संकेत मिलता है कि वे अपनी बात को सत्य सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
वे अभी बालक हैं और उनके चरण अत्यंत कोमल हैं, इसलिए गाय चराने जाना उनके लिए कष्टदायक अनुभव है।

माता यशोदा अन्य ग्वालिनों की बात सुनकर क्रोधित हो जाती हैं, परंतु कवि ने यह दिखाया है कि कृष्ण अभी बहुत छोटे हैं।
वे गाय चराने जैसी कठिन जिम्मेदारी निभाने के लिए स्वयं को तैयार नहीं मानते।

निष्कर्ष: बाल कृष्ण गाय चराने इसलिए नहीं जाना चाहते हैं, क्योंकि ग्वालबाल उन्हें घेर लेते हैं और उनके कोमल पैरों में दर्द होता है, जिससे उन्हें कष्ट का अनुभव होता है।
Was this answer helpful?
0