Question:medium

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए : "कबहुँ होत सत चंद कबहुँ प्रगटत दुरि भाजत। पवन गवन बस बिंब रूप जल मैं बहु साजत॥ मनु ससि भरि अनुराग जमुन जल लोटत डोलै। कै तरंग की डोर हिंडोरनि करति कलोलै॥ कै बालगुड़ी नभ मैं उड़ी सोहत इत-उत धावती। कै अवगाहत डोलत कोउ ब्रजरमनी जल आवती॥" (i) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ एवं रचयिता का नाम लिखिए। (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (iii) 'मनु ससि भरि अनुराग जमुन जल लोटत डोलै।' इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए। (iv) 'बालगुड़ी' तथा 'हिंडोरनि' शब्द का अर्थ लिखिए। (v) 'अवगाहन' यह शब्द किस शब्द का पर्यायवाची शब्द है?

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

संक्षिप्त समेकित उत्तर:
यह रीतिकालीन कवि की रचना है, जिसमें यमुना-जल में चन्द्र-प्रतिबिम्ब के चंचल हिलने-डुलने का बहुविध कल्पनाशील चित्रण किया गया है — कभी वह प्रेमी-सा लोटता, कभी झूला झूलता, कभी पतंग-सा उड़ता, कभी स्नान करती ब्रज-रमणी-सा प्रतीत होता है। 'मनु' शब्द के प्रयोग से यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार सिद्ध होता है। 'बालगुड़ी' छोटी पतंग और 'हिंडोरनि' झूले के अर्थ में प्रयुक्त हुए हैं, तथा 'अवगाहन' का पर्यायवाची शब्द 'स्नान' है।
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