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'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर लिखिए कि कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का लेखन में क्या महत्त्व है ?

Updated On: Mar 1, 2026
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Solution and Explanation

'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ में, लेखक अज्ञेय ने लेखन में रचनाकार के स्वभाव और आत्म-अनुशासन को ज़रूरी बताया है।
रचनाकार का स्वभाव ही उसे लिखने के लिए प्रेरित करता है। उसकी अंदरूनी इच्छा या भावनाएँ उसे लिखने पर मजबूर करती हैं।
यह स्वभाव उसे बाहरी दुनिया के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिससे वह घटनाओं और अनुभवों को अच्छी तरह समझ पाता है।
आत्म-अनुशासन लेखन को व्यवस्थित करता है। यह लेखक को विचारों को सही ढंग से रखने, भाषा पर नियंत्रण रखने और ज़्यादा विस्तार से बचने में मदद करता है।
आत्म-अनुशासन के बिना, लेखन बिखरा हुआ और बेकार हो सकता है, चाहे लेखक कितना भी संवेदनशील क्यों न हो।
इसलिए, अच्छे और सार्थक लेखन के लिए रचनाकार के स्वभाव (आंतरिक प्रेरणा) और आत्म-अनुशासन (बाहरी नियंत्रण) का मेल होना ज़रूरी है।
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