Concept:
- कवि यहाँ एक रूपक रच रहा है, अर्थात वर्तमान की स्थिति को रामायण के पात्रों में ढाल रहा है।
- रूपक खोलने के लिए यह देखना चाहिए कि आज कौन किसके स्थान पर है।
Step 1: रूपक के पात्र बिठाइए।
सीता के स्थान पर है
भारत माता, रावण के स्थान पर है
देश का शत्रु, और राम-लक्ष्मण के स्थान पर हैं
देश के सैनिक।
Step 2: अब पंक्ति को इस रूपक से पढ़िए।
‘राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियों’ का अर्थ हुआ कि हे साथियो, मातृभूमि की रक्षा का वही दायित्व जो कभी राम-लक्ष्मण ने निभाया था, अब तुम्हारा है।
Step 3: रूपक का प्रभाव समझिए।
इस तुलना से सैनिक का कार्य केवल युद्ध न रहकर धर्म का कार्य बन जाता है। जो काम मर्यादा पुरुषोत्तम ने किया, वही आज सैनिक कर रहा है, यह भाव बहुत बड़ा बल देता है।
Step 4: गीत के समग्र भाव से जोड़िए।
पूरा गीत बलिदान और कर्तव्य का है। मरते सैनिक चाहते हैं कि उनके बाद भी यह परंपरा न रुके, इसीलिए वे साथियों को राम और लक्ष्मण कहकर उत्तरदायित्व सौंपते हैं।
Final Answer: कवि यहाँ भारत माता को सीता, शत्रु को रावण और सैनिकों को राम-लक्ष्मण के रूप में देखता है। पंक्ति का आशय है कि जैसे राम-लक्ष्मण ने सीता की रक्षा की थी, वैसे ही अब सैनिकों को मातृभूमि की रक्षा करनी है, यह उनका पवित्र कर्तव्य है।