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'खड़-खड़ खड़ताल बजा रही विसुध हवा' - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? 
 

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जब किसी निर्जीव वस्तु या प्रकृति को मनुष्य की तरह व्यवहार करते हुए दर्शाया जाए (जैसे - हँसना, रोना, गाना), तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
Updated On: Mar 7, 2026
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Solution and Explanation

'खड़-खड़ खड़ताल बजा रही विसुध हवा' - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

1. काव्य पंक्ति का विश्लेषण:
यह काव्य पंक्ति प्राकृतिक दृश्य और उसकी ध्वनियों का वर्णन करती है। "खड़-खड़ खड़ताल बजा रही विसुध हवा" में 'विसुध हवा' (स्वच्छ हवा) के द्वारा 'खड़ताल' (ताल बजाने की ध्वनि) की तरह खड़खड़ाहट की आवाज उत्पन्न होने की बात कही गई है। यह शब्दों का अत्यधिक सजीव और चित्रात्मक उपयोग किया गया है।

2. अलंकार की पहचान:
इस काव्य पंक्ति में श्रव्यात्मक अलंकार (Onomatopoeia) है। "खड़-खड़" और "खड़ताल" शब्द ध्वनियों का चित्रण कर रहे हैं, जो वास्तविक जीवन में सुनने में आती हैं। यह अलंकार विशेष रूप से ध्वनियों का अनुकरण करने के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "खड़-खड़" और "खड़ताल" शब्द हवा के द्वारा उत्पन्न ध्वनियों को व्यक्त कर रहे हैं।

3. श्रव्यात्मक अलंकार की व्याख्या:
श्रव्यात्मक अलंकार वह अलंकार होता है जिसमें शब्दों के द्वारा किसी ध्वनि या आवाज़ की वास्तविकता का संकेत दिया जाता है। इस पंक्ति में "खड़-खड़" शब्द हवा के द्वारा उत्पन्न होने वाली ध्वनियों की ओर इशारा करता है और यह अलंकार इस ध्वनि को और अधिक जीवंत बना देता है।

4. निष्कर्ष:
इस काव्य पंक्ति में श्रव्यात्मक अलंकार है, क्योंकि "खड़-खड़" और "खड़ताल" शब्दों के माध्यम से हवा की आवाज़ को व्यक्त किया गया है, जो कि एक ध्वनिमूलक अलंकार है। यह अलंकार पंक्ति को और अधिक प्रभावशाली और चित्रात्मक बनाता है।

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