Question:medium

हृदय-गगन में रूप-चंद्रिका बनकर उतरो मेरे - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? 
 

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रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच योजक चिह्न (-) का प्रयोग हो सकता है और 'सा', 'जैसा' जैसे वाचक शब्द नहीं होते। (जैसे - चरण-कमल)।
Updated On: Mar 7, 2026
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Solution and Explanation

हृदय-गगन में रूप-चंद्रिका बनकर उतरो मेरे - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

1. काव्य पंक्ति का विश्लेषण:
इस काव्य पंक्ति में "हृदय-गगन में रूप-चंद्रिका बनकर उतरो मेरे" का अर्थ है कि व्यक्ति अपने प्रियतम से यह अनुरोध कर रहा है कि वह उनके हृदय और मन (गगन) में रूप-चंद्रिका (चाँद के रूप में सुंदरता) बनकर उतरे। यहाँ चंद्रिका का रूपक (रूपक अलंकार) के रूप में प्रयोग किया गया है, जो किसी सुंदरी या प्रिय वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

2. अलंकार की पहचान:
इस काव्य पंक्ति में रूपक अलंकार है। "रूप-चंद्रिका" का प्रयोग यहाँ पर प्रियतम के रूप की सुंदरता और आकर्षण को व्यक्त करने के लिए किया गया है। चंद्रिका शब्द का उपयोग इस पंक्ति में रूपक के रूप में किया गया है, क्योंकि चाँद के रूप में जो सौंदर्य और आकर्षण होता है, वही प्रियतम के रूप में चित्रित किया गया है।

3. रूपक अलंकार की व्याख्या:
रूपक अलंकार में किसी वस्तु या गुण को दूसरे रूप में व्यक्त किया जाता है, जैसे कि यहाँ 'चंद्रिका' का रूपक रूप में प्रियतम के रूप की सुंदरता को दर्शाने के लिए किया गया है। इस वाक्य में चाँद की रोशनी को प्रियतम के रूप की सुंदरता के समान माना गया है।

4. निष्कर्ष:
इस काव्य पंक्ति में रूपक अलंकार का प्रयोग किया गया है, क्योंकि "रूप-चंद्रिका" से प्रियतम के रूप की सुंदरता की तुलना चाँद की सुंदरता से की गई है। यह अलंकार एक सुंदर और चित्रात्मक तरीके से प्रियतम के रूप को व्यक्त करता है, जो काव्य की प्रभावशालीता को बढ़ाता है।

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