Question:hard

‘जिनसे अपनापन मिले, अपने वे ही होते हैं फिर चाहे वे अलग परिवार, जाति, धर्म के ही क्यों न हों।’ – ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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तुलना करके लिखिए। एक ओर टोपी को अपने घर में मिली उपेक्षा और दूसरी ओर इफ़्फ़न की दादी से मिला स्नेह, और उसका दादी बदलने वाला कथन भी जोड़िए।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • कथन के पक्ष में लिखने का सबसे प्रभावी तरीका तुलना है, अर्थात यह दिखाना कि जहाँ अपनापन मिलना चाहिए था वहाँ नहीं मिला और जहाँ से अपेक्षा नहीं थी वहाँ मिला।
  • पाठ इसी तुलना पर टिका है।

Step 1: पहली ओर, जहाँ से अपनापन मिलना चाहिए था।
टोपी का अपना परिवार, अपनी दादी, अपनी माँ, अपने भाई और अपना ही धर्म। नियम से तो सारा स्नेह यहीं से मिलना चाहिए था।
पर वास्तव में उसे यहाँ डाँट, उपेक्षा और उपहास ही मिला।

Step 2: दूसरी ओर, जहाँ से अपेक्षा नहीं थी।
इफ़्फ़न का परिवार दूसरे धर्म का था और इफ़्फ़न की दादी का टोपी से कोई रक्त-संबंध नहीं था। फिर भी उन्होंने उसे भरपूर स्नेह दिया, उसकी बातें सुनीं और उसे अपनापन दिया।

Step 3: टोपी की अपनी बात से प्रमाण दीजिए।
टोपी ने स्वयं कहा था कि वह अपनी दादी के बदले इफ़्फ़न की दादी को लेना चाहता है। एक बच्चा तभी ऐसा कहता है जब उसे सचमुच किसी से गहरा जुड़ाव हो।

Step 4: निष्कर्ष तक पहुँचिए।
दोनों पक्षों की तुलना बता देती है कि रिश्ता जन्म से नहीं बनता, बल्कि उस व्यवहार से बनता है जो हमें मिलता है। दादी के निधन पर टोपी का अकेलापन इसी सच्चाई का प्रमाण है।

Final Answer: टोपी को अपने ही घर में अपनापन नहीं मिला और दूसरे धर्म की इफ़्फ़न की दादी से भरपूर स्नेह मिला। यही तुलना कथन को सिद्ध करती है कि अपने वही होते हैं जिनसे अपनापन मिले, चाहे उनका परिवार, जाति या धर्म कुछ भी हो।
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