Question:medium

‘आत्म त्राण’ कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है?

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ध्यान रखिए कि कवि दुख दूर करने की प्रार्थना नहीं करता। वह दुख सहने की शक्ति माँगता है, यही कविता का मूल भाव है।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • इस कविता की विशेषता यह है कि यह सामान्य प्रार्थना से अलग है। साधारण भक्त दुख हटाने की माँग करता है, यह कवि दुख सहने का बल माँगता है।
  • इसी अंतर को पकड़ लेने पर पूरा उत्तर खुल जाता है।

Step 1: पहले बताइए कि कवि क्या नहीं माँगता।
वह यह नहीं माँगता कि विपदाएँ उसके जीवन में आएँ ही नहीं, और न ही यह कि ईश्वर आकर उसे संकट से निकाल दें।

Step 2: अब बताइए कि वह क्या माँगता है।
वह केवल यह माँगता है कि विपदा में उसे भय न हो और वह उसे सहन कर सके। यही कविता का शीर्षक आत्म त्राण अर्थात स्वयं की रक्षा सार्थक करता है।

Step 3: अपनों के छोड़ने पर उसका रुख देखिए।
यदि दुख की रात में सब उसे छोड़ दें और कोई सहायता करने वाला न बचे, तब भी वह चाहता है कि उसका आत्मबल बना रहे और वह स्वयं पर संदेह न करे।

Step 4: छल किए जाने पर उसका रुख देखिए।
अपनों के धोखा देने पर भी वह चाहता है कि मन में कड़वाहट न भरे। वह किसी को दोष नहीं देना चाहता, बल्कि अपने भीतर धैर्य बनाए रखना चाहता है और बिना सिर झुकाए आगे बढ़ना चाहता है।

Final Answer: कवि संकट हटाने की नहीं, संकट सहने की शक्ति माँगता है। अपनों के साथ छोड़ देने और छल करने पर भी वह चाहता है कि उसका विश्वास बना रहे, मन में कटुता न आए, और वह अपने आत्मबल तथा धैर्य के सहारे बिना झुके संकट का सामना करे।
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