Question:hard

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में लिखिए :

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए उल्लेख कीजिए कि अभिव्यक्ति के अधिकार में लेखन किस प्रकार सहायक है ?

Show Hint

अप्रत्याशित विषय पर अपनी कल्पना और अनुभव से लिखना होता है; लेखन से विचार निर्भीकता से प्रकट होते हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न के दो भाग पहचानिए:
पहले भाग में अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अभिप्राय स्पष्ट करना है और दूसरे में बताना है कि यह अभिव्यक्ति के अधिकार में कैसे सहायक है।

चरण 2: उदाहरण के साथ पहले भाग का उत्तर:
मान लीजिए परीक्षा में अचानक ‘बारिश की पहली बूँद’ या ‘सड़क का आख़िरी दीया’ जैसा विषय मिल जाए। इस पर लिखने के लिए रटी हुई सामग्री काम नहीं आती, अपनी कल्पना और अनुभव ही काम आते हैं। यही अप्रत्याशित विषय पर लेखन है।

चरण 3: दूसरे भाग का उत्तर:
जब कोई व्यक्ति ऐसे विषयों पर खुलकर लिखता है तो उसे अपनी राय बनाने, उसे तर्क से सजाने और बिना भय प्रकट करने का अभ्यास मिलता है। यही अभ्यास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यवहार में बदलता है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 80 शब्द):
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन में हमें अचानक दिए गए किसी विषय पर बिना पूर्व तैयारी के अपने ढंग से विचार लिखने होते हैं। इसमें कल्पना, अनुभव और भाषा-कौशल की परीक्षा होती है। लेखन अभिव्यक्ति के अधिकार का मुख्य आधार है, क्योंकि इससे हम अपने विचार निर्भीकता से व्यक्त करते हैं, समाज की समस्याओं पर ध्यान खींचते हैं और अपनी बात को स्थायी रूप देते हैं। इस प्रकार लेखन व्यक्ति को सचेत और अभिव्यक्त नागरिक बनाता है।

अंतिम उत्तर:
ऐसे लेखन से मौलिक विचार निखरते हैं और अभिव्यक्ति का अधिकार सार्थक रूप लेता है।
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