Question:medium

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ में बताया गया है कि कबीरदास को पंद्रह-बीस दिन का लहक उठना पसंद नहीं था। ‘लहक उठना’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि क्या आप भी इसमें विश्वास रखते हैं ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

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पंद्रह-बीस दिन फूलने वाले अमलतास और पलाश की तुलना लंबे समय तक फूलने वाले शिरीष से कीजिए। फिर अपने तर्क दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: शब्द का भाव:
'लहक' का अर्थ है लपट या उभार।
'लहक उठना' यानी अचानक बहुत उत्साह और शोभा से भर जाना।
पाठ में यह थोड़े दिन का खिलना है, जो जल्दी समाप्त हो जाता है।

चरण 2: पाठ में तुलना:
लेखक के अनुसार अमलतास पंद्रह-बीस दिन के लिए फूलता है, जैसे वसंत में पलाश।
कबीर ने भी कहा है कि पलाश दस दिन फूलकर फिर खंखड़ (सूखा, ठूँठ जैसा) हो गया।
लेखक ऐसे थोड़े दिन के फूलने वालों की तुलना में शिरीष को श्रेष्ठ मानते हैं, जो लू और गरमी में भी लंबे समय तक फूलता रहता है।
लेखक यह भी कहते हैं कि कबीर बहुत-कुछ शिरीष के समान ही थे, मस्त और बेपरवा, पर सरस और मादक।

चरण 3: अपना विचार:
हाँ, मैं भी इसमें विश्वास रखता हूँ।
जो व्यक्ति कुछ दिन जोश दिखाकर हार मान लेता है, वह बड़े काम नहीं कर पाता।
गरमी और लू में भी खिला रहने वाला शिरीष सिखाता है कि हर परिस्थिति में संतुलन और निरंतरता बनाए रखनी चाहिए।

अंतिम उत्तर:
'लहक उठना' का अर्थ है थोड़े समय के लिए खिल उठना और फिर सूख जाना; स्थायी उत्साह और निरंतर परिश्रम ही जीवन को सार्थक बनाते हैं, इसलिए मैं इस विचार से सहमत हूँ।
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