Question:medium

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ से उद्धृत पंक्ति ‘महाकाल देवता सपासप कोड़े चला रहे हैं’ – का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि लेखक ने कालदेवता से बचने का क्या उपाय बताया है ?

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'महाकाल' का अर्थ समय है। लेखक के 'हिलते-डुलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो' वाले कथन को याद कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: शिरीष का उदाहरण:
'शिरीष के फूल' में लेखक द्विवेदी जी शिरीष के पुराने फलों का उदाहरण देते हैं जो नए पत्तों के आने पर भी डटे रहते हैं, पर अंत में धक्का देकर गिरा दिए जाते हैं।
इसी से वे समय की कठोर शक्ति की बात करते हैं।

चरण 2: 'सपासप कोड़े' का भाव:
'सपासप कोड़े चलाना' का अर्थ है लगातार और तेजी से प्रहार करना।
काल किसी को नहीं छोड़ता, जो पुरानी बातों से चिपका रहता है और बदलता नहीं, वह नष्ट हो जाता है।
यह जीवन की नश्वरता और परिवर्तन के नियम की ओर संकेत है।

चरण 3: लेखक का सुझाया मार्ग:
लेखक कहते हैं कि मूर्ख लोग सोचते हैं कि एक जगह जमे रहने से काल की आँख से बच जाएँगे, पर ऐसा नहीं होता।
जो व्यक्ति चलता रहता है, स्वयं को बदलता रहता है और भविष्य की ओर देखता है, वही समय की मार से बच सकता है।

अंतिम उत्तर:
काल निरंतर प्रहार करता है; गतिशीलता, स्थान-परिवर्तन और आगे की ओर दृष्टि रखना ही उससे बचने का उपाय है, क्योंकि 'जमे कि मरे'।
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