Question:medium

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘शिरीष के फूल’ पाठ में लेखक द्वारा शिरीष, अवधूत और गाँधी जी को समानांतर किस आधार पर रखा गया है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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शिरीष के लू और धूप में भी खिले रहने के गुण को अवधूत की अनासक्ति और गाँधी जी की स्थिरता से जोड़िए।
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Solution and Explanation

चरण 1: तुलना के तीन पात्र:
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने 'शिरीष के फूल' में एक वृक्ष, एक संन्यासी और एक महापुरुष की तुलना की है।
तीनों में जो साझा गुण है, वही इस तुलना का आधार है।
यह गुण है कठिनाइयों में भी स्थिर और निर्लिप्त रहना।

चरण 2: पहला आधार, अनासक्ति:
अवधूत संसार में रहकर भी उससे बँधा नहीं रहता।
शिरीष भी गर्मी, लू और धूल के बीच निश्चिंत भाव से फूलता है।
गाँधी जी भी पद, धन और यश से अनासक्त रहकर देश की सेवा करते रहे।

चरण 3: दूसरा आधार, संघर्ष में स्थिरता:
जब चारों ओर भीषण गर्मी है, तब शिरीष अडिग खड़ा है।
उसी प्रकार जब देश में हिंसा और अशांति फैली थी, तब गाँधी जी शांत और अविचल रहे।
लेखक के अनुसार दोनों वायुमंडल से रस खींचकर इतने कोमल और इतने कठोर बन सके।

चरण 4: तर्कपूर्ण निष्कर्ष:
तीनों का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा जीवन वही है जो परिस्थितियों से हार न माने।
इसलिए लेखक कहते हैं कि शिरीष को देखकर उन्हें उस अवधूत (गाँधी जी) की याद आती है।

अंतिम उत्तर:
अनासक्त भाव, कठिन परिस्थितियों में अविचल रहना और कोमलता के साथ कठोरता, इन्हीं समान गुणों के कारण शिरीष, अवधूत और गाँधी जी को एक पंक्ति में रखा गया है।
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