Question:medium

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘दुःख हो या सुख, वह हार नहीं मानता। न ऊधो का लेना, न माधो का देना।’ ‘शिरीष के फूल’ पाठ में आई यह पंक्ति किसके लिए कही गई, उसकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Show Hint

सोचिए कि भीषण गर्मी में भी कौन-सा वृक्ष फूलों से लदा और मस्त रहता है।
Show Solution

Solution and Explanation

चरण 1: किसके लिए कहा गया:
द्विवेदी जी ने अपने निबंध ‘शिरीष के फूल’ में यह बात शिरीष वृक्ष के विषय में कही है।
लेखक शिरीष को एक ऐसे संन्यासी के रूप में देखते हैं, जिसे सुख-दुख प्रभावित नहीं करते।

चरण 2: मुहावरे का भाव:
‘न ऊधो का लेना, न माधो का देना’ मुहावरा किसी से मतलब न रखने के अर्थ में आता है।
शिरीष भी संसार की चिंता से दूर, अपनी धुन में आठों पहर मस्त रहता है।

चरण 3: विशेषताओं का उल्लेख:
जब धरती और आसमान जलते हैं, तब भी शिरीष खिलता है, यह उसकी सहनशीलता है।
वह लंबे समय तक फूलता रहता है, इसलिए लेखक उसे कालजयी कहते हैं।
वह अनासक्त योगी की तरह है और लेखक उसकी तुलना गांधीजी जैसे स्थिर और अडिग व्यक्तित्व से करते हैं।
वह हमें कठिन समय में भी जीवन से हार न मानने की सीख देता है।

अंतिम उत्तर:
पंक्ति शिरीष के लिए है, जिसकी विशेषताएँ हैं: सहनशीलता, अनासक्ति, फक्कड़पन, लंबे समय तक खिलना और हर हाल में मस्त रहना।
Was this answer helpful?
0

Top Questions on शिरीष के फूल