Question:medium

यह क्यों कहा जाता है कि नाटक ही एक ऐसी विधा है जो हमेशा वर्तमान काल में घटित होती है? किसी ऐतिहासिक या पौराणिक नाटक के उदाहरण से इसे स्पष्ट कीजिए।

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नाटक की विशिष्टता समझते समय ‘मंचन’ की भूमिका और दर्शकों की तात्कालिक प्रतिक्रिया को ज़रूर ध्यान में रखें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

नाटक ही एकमात्र ऐसी साहित्यिक विधा है जो मंचन के दौरान ‘यहाँ और अभी’ के अनुभव में घटित होती है। कहानी चाहे भूतकाल या भविष्यकाल की हो, मंच पर उसका प्रदर्शन वर्तमान में होता है। दर्शक उसी समय पात्रों के संवाद, भावनाओं और घटनाओं का अनुभव करते हैं।
‘अंधायुग’ नाटक इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो महाभारत युद्ध के अंतिम दिनों पर आधारित है। पौराणिक कथा पर आधारित होने पर भी, मंचन के दौरान घटनाएँ दर्शकों को उसी समय घटित होती प्रतीत होती हैं।
पात्रों की पीड़ा, नैतिक संघर्ष और सामाजिक मूल्य — सब कुछ आज के संदर्भ में सजीव हो उठता है। यही नाटक की विशेषता है — यह किसी भी युग की कथा को वर्तमान अनुभूति में परिवर्तित कर देता है।
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