विस्तृत समाधान:
विजयनगर साम्राज्य दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली और समृद्ध राज्य था। इसकी राजधानी हम्पी क्षेत्र में स्थित थी, जहाँ वर्षा सीमित मात्रा में होती थी। इसलिए वहाँ की जल-आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुव्यवस्थित और उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई थी।
1️⃣ बाँध और जलाशय (टैंक प्रणाली):
विजयनगर में नदियों और छोटी धाराओं पर बाँध बनाकर बड़े-बड़े जलाशय (टैंक) तैयार किए जाते थे। इन जलाशयों में वर्षा का पानी एकत्र किया जाता था और आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग सिंचाई, पेयजल तथा अन्य कार्यों के लिए किया जाता था।
2️⃣ नहरों की व्यवस्था:
तुंगभद्रा नदी से नहरें निकालकर जल को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता था। इन नहरों के माध्यम से खेतों की सिंचाई की जाती थी और नगर की जल-आपूर्ति सुनिश्चित की जाती थी। यह व्यवस्था कृषि उत्पादन बढ़ाने में अत्यंत सहायक थी।
3️⃣ कुएँ और बावड़ियाँ:
नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनेक कुएँ और बावड़ियाँ बनाई गई थीं। इनका उपयोग दैनिक घरेलू आवश्यकताओं तथा पेयजल के लिए किया जाता था।
4️⃣ वर्षा जल संचयन:
वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए विशेष संरचनाएँ बनाई गई थीं, जिससे पानी व्यर्थ न जाए और लंबे समय तक उपलब्ध रहे।
निष्कर्ष:
इस प्रकार, विजयनगर में बाँधों, जलाशयों, नहरों, कुओं और वर्षा जल संचयन की विकसित प्रणाली के माध्यम से जल-आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाता था। यह उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग और प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है।