Step 1: प्रश्न को समझना।
तीन सतहों की कार्य-फलन $\phi_1 < \phi_2 < \phi_3$ हैं और तरंगदैर्ध्य $\lambda_1 < \lambda < \lambda_2$ तथा $\lambda_3 >> \lambda$ है। हमें निरोधक विभव $V_1$, $V_2$, $V_3$ की तुलना करनी है।
Step 2: प्रकाश-विद्युत समीकरण।
\[ eV_s = h\nu - \phi = \frac{hc}{\lambda} - \phi \]
Step 3: सतह 1 के लिए।
$\phi_1$ सबसे कम है, इसलिए $eV_1 = hc/\lambda - \phi_1$ सबसे अधिक होगा, $V_1$ सबसे अधिक।
Step 4: सतह 2 के लिए।
$\lambda < \lambda_2$ यानी $h\nu > \phi_2$, इसलिए प्रकाश-विद्युत प्रभाव होता है और $V_2 > 0$।
Step 5: सतह 3 के लिए।
$\lambda_3 >> \lambda$ यानी $\lambda_3$ बहुत बड़ा है, इसलिए आपतित प्रकाश की ऊर्जा $\phi_3$ से कम है। कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं, $V_3 = 0$।
Step 6: अंतिम उत्तर।
\[ \boxed{V_1 > V_2, \; V_3 = 0} \]