Question:medium

सूरदास की झोंपड़ी जलने के समय सुभागी कहाँ थी? सूरदास की दुर्दशा के लिए वह स्वयं को ज़िम्मेदार क्यों मान रही थी? सुभागी की अवस्था के सामाजिक कारणों का उल्लेख कीजिए। 
 

Show Hint

किसी पात्र की प्रतिक्रिया या आत्मग्लानि को समझने के लिए उसके सामाजिक और आर्थिक संदर्भ को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इससे कहानी के मानवीय और सामाजिक पक्षों की गहराई स्पष्ट होती है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

जब सूरदास की झोंपड़ी में आग लगी, उस समय सुभागी जंगल में लकड़ी लेने गई थी। आग लगने का समाचार मिलने पर, वह दौड़कर वहाँ पहुँची, लेकिन तब तक झोंपड़ी जल चुकी थी और सूरदास बेसहारा होकर बाहर पड़े थे।

सुभागी खुद को सूरदास की इस हालत के लिए दोषी मानती है, क्योंकि अगर वह वहाँ होती तो शायद आग न लगती या सूरदास को बचा सकती थी। यह भावना उसकी सेवा और मानवीय संवेदना को दर्शाती है।

सुभागी की सामाजिक स्थिति भी इस घटना को प्रभावित करती है। एक गरीब और असहाय महिला होने के कारण, वह न तो अपनी रक्षा कर पाती है और न ही समाज में सम्मान पाती है। उसकी गरीबी, असुरक्षा और उपेक्षा ही उसे ऐसे हालातों में धकेलती है। यह सामाजिक व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है, जहाँ संवेदनशील लोग भी लाचार हो जाते हैं।
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