‘राज्य हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) अंग्रेजों द्वारा अपनाई गई एक विस्तारवादी नीति थी, जिसके माध्यम से वे भारतीय रियासतों को अपने अधीन कर लेते थे। यह नीति विशेष रूप से गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी के समय में लागू की गई थी।
नीति का मुख्य आधार:
इस नीति के अनुसार यदि किसी भारतीय शासक की मृत्यु बिना सगे (जैविक) उत्तराधिकारी के हो जाती थी, तो उसका राज्य स्वतः ही अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन कर लिया जाता था। अंग्रेज दत्तक पुत्र को वैध उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार नहीं करते थे। इस प्रकार, दत्तक उत्तराधिकार की परंपरा को अस्वीकार कर कई राज्यों को हड़प लिया गया।
प्रमुख प्रभावित राज्य:
इस नीति के अंतर्गत सतारा, झाँसी, नागपुर, संभलपुर आदि राज्यों को अंग्रेजों ने अपने शासन में मिला लिया। विशेष रूप से झाँसी राज्य के विलय से व्यापक असंतोष उत्पन्न हुआ और रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया।
परिणाम और प्रभाव:
राज्य हड़प नीति के कारण भारतीय शासकों और आम जनता में गहरा असंतोष फैल गया। इससे अंग्रेजी शासन के प्रति अविश्वास और विरोध की भावना बढ़ी। यही असंतोष आगे चलकर 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख कारण बना।
अतः ‘राज्य हड़प नीति’ अंग्रेजों की साम्राज्य विस्तार की एक नीति थी, जिसने भारतीय रियासतों की स्वतंत्रता को समाप्त किया और व्यापक असंतोष को जन्म दिया।