चरण 1: निबन्ध की योजना:
पहले बेरोजगारी के प्रकार बताए जाएँगे, फिर कारण, समाज पर प्रभाव और अन्त में समाधान लिखे जाएँगे।
रूपरेखा: भूमिका, बेरोजगारी के प्रकार, कारण, समाज पर प्रभाव, समाधान के उपाय, उपसंहार।
चरण 2: निबन्ध:
भूमिका
किसी भी देश की सबसे बड़ी पूँजी उसके काम करने वाले हाथ होते हैं। जब इन हाथों को काम नहीं मिलता, तो वही पूँजी बोझ बन जाती है। भारत में बेरोजगारी आज एक गम्भीर चुनौती है, जिसका हल खोजना बहुत जरूरी है।
बेरोजगारी के प्रकार
पहला प्रकार शिक्षित बेरोजगारी है, जिसमें डिग्रीधारी युवक को नौकरी नहीं मिलती। दूसरा प्रकार प्रच्छन्न बेरोजगारी है, जिसमें खेत पर जरूरत से अधिक लोग लगे रहते हैं और उनके हटने से उत्पादन पर असर नहीं पड़ता। तीसरा प्रकार मौसमी बेरोजगारी है, जिसमें किसान को फसल के बीच के महीनों में कोई काम नहीं मिलता।
कारण
बढ़ती आबादी के अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बढ़े। शिक्षा में कौशल की कमी है, इसलिए डिग्री होने पर भी युवा उद्योगों की माँग पर खरे नहीं उतरते। खेती पर अत्यधिक निर्भरता है। निजी क्षेत्र में भी नौकरी की सुरक्षा कम है। भ्रष्टाचार और सिफारिश के कारण योग्य व्यक्ति पीछे रह जाते हैं।
समाज पर प्रभाव
खाली बैठे युवक का आत्मविश्वास टूट जाता है। घर में झगड़े और आर्थिक तंगी बढ़ती है। कुछ युवक गलत संगत में पड़कर अपराध की ओर चले जाते हैं। इससे समाज की शान्ति भंग होती है और देश की उन्नति रुकती है।
समाधान के उपाय
स्कूल के स्तर से ही व्यावसायिक शिक्षा दी जाए। युवाओं को सस्ते ऋण देकर अपना छोटा उद्योग शुरू करने में सहायता दी जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी, मुर्गी-पालन, बागवानी और हस्तशिल्प जैसे धन्धे बढ़ाए जाएँ। सरकारी भर्तियाँ समय पर और पारदर्शी ढंग से हों। उद्योगों को नए कारखाने लगाने के लिए सुविधाएँ दी जाएँ।
उपसंहार
बेरोजगारी एक दिन में समाप्त नहीं हो सकती, परन्तु सही योजना और ईमानदार प्रयास से इसे काफी घटाया जा सकता है। युवाओं को नौकरी माँगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनने का सपना देखना चाहिए।
निष्कर्ष:
रोजगार के अवसर बढ़ने पर ही देश की युवा-शक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकेगी।