चरण 1: वाक्य को परखें:
‘यह पुस्तक देवेश ने लिखा’ में ‘ने’ लगा है और क्रिया ‘लिखा’ पुल्लिंग रूप में है, जबकि पुस्तक स्त्रीलिंग है।
चरण 2: दोष का कारण:
‘ने’ वाले कर्तृवाच्य वाक्य में क्रिया कर्ता की बात नहीं मानती, कर्म की मानती है। कर्म शब्द ‘पुस्तक’ स्त्रीलिंग एकवचन है, इसलिए क्रिया भी स्त्रीलिंग एकवचन चाहिए। उदाहरण: राम ने रोटी खाई, सीता ने पत्र लिखा।
चरण 3: सुधार:
लिखा को बदलकर लिखी करने पर वाक्य शुद्ध होता है: यह पुस्तक देवेश ने लिखी।
निष्कर्ष:
यह लिंग-सम्बन्धी अशुद्धि थी। क्रिया कर्म ‘पुस्तक’ के अनुसार ‘लिखी’ होगी।