चरण 1: निबन्ध की योजना:
(प्रिय कवि के रूप में यहाँ भी तुलसीदास का चयन है। विद्यार्थी अपनी रुचि का कोई और कवि लेकर यही क्रम अपना सकता है।)
(क) भूमिका
(ख) कवि का संक्षिप्त जीवन
(ग) रामचरितमानस का महत्त्व
(घ) काव्य की विशेषताएँ
(ङ) आज के समाज के लिए सन्देश
(च) समापन
चरण 2: निबन्ध:
भूमिका
कविता का काम केवल मन बहलाना नहीं, मनुष्य को अच्छा बनाना भी है। इस कसौटी पर मुझे तुलसीदास सबसे खरे कवि लगते हैं। वे जन-जन के कवि हैं और उनकी वाणी में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती है।
कवि का संक्षिप्त जीवन
तुलसीदास का जन्म राजापुर, जिला बाँदा में हुआ माना जाता है। बचपन कठिनाइयों में बीता। गुरु नरहरिदास से उन्होंने राम-कथा सुनी और शिक्षा पाई। जीवन का बड़ा भाग अयोध्या और काशी में बीता। सन् 1623 के आसपास काशी के असी घाट पर उनका निधन हुआ।
रामचरितमानस का महत्त्व
मानस की रचना उन्होंने संवत् 1631 में अयोध्या में आरम्भ की। सात काण्डों में बँटा यह ग्रन्थ आज भी घर-घर में पढ़ा और गाया जाता है। इसमें राम का जीवन इस प्रकार प्रस्तुत है कि हर पाठक उससे अपने कर्तव्य की प्रेरणा पा सके। इसके अतिरिक्त विनयपत्रिका उनके भक्ति-भाव और आत्मनिवेदन का श्रेष्ठ उदाहरण है, तो कवितावली में ब्रज भाषा का सुन्दर प्रयोग मिलता है।
काव्य की विशेषताएँ
तुलसी की सबसे बड़ी विशेषता समन्वय है। वे किसी एक मत के पक्ष में अड़े नहीं, बल्कि सबको जोड़ने की बात करते हैं। उनकी भक्ति में विनम्रता और समर्पण है। ‘सियाराम मय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥’ जैसी पंक्ति में समस्त संसार में ईश्वर को देखने की भावना प्रकट होती है। भाषा पर उनका ऐसा अधिकार था कि अवधी और ब्रज दोनों में समान सहजता से लिखा। सरल शब्दों में गहरी बात कहना उनकी शैली की पहचान है।
आज के समाज के लिए सन्देश
आज जब रिश्तों में दूरी और स्वार्थ बढ़ रहा है, तुलसी के राम हमें भाई का प्रेम, माता-पिता का आदर और वचन की रक्षा सिखाते हैं। दूसरों की भलाई को सबसे बड़ा धर्म मानने की उनकी सीख हर युग में उपयोगी है।
समापन
तुलसीदास हिन्दी के ऐसे कवि हैं जिन्होंने साहित्य को लोक से और लोक को आदर्श से जोड़ा। उनके काव्य ने मुझे जीवन में सच्चाई, विनम्रता और धैर्य का महत्त्व सिखाया है। इसीलिए वे मेरे प्रिय कवि हैं।
निष्कर्ष:
यह निबन्ध कवि के जीवन, प्रमुख ग्रन्थ, विशेषताओं और आज की प्रासंगिकता को क्रम से रखकर विषय का पूरा उत्तर देता है।