चरण 1: वाक्य को पढ़ें:
‘वह कभी हानि-लाभ की चिंता नहीं करता है।’ में अर्थ ठीक है, पर वाक्य की बनावट में दोष है।
चरण 2: दोष क्या है:
सकारात्मक वाक्य में हम कहते हैं ‘वह चिन्ता करता है’। पर जब ‘नहीं’ लग जाए, तो ‘है’ हट जाता है और वाक्य ‘नहीं करता’ पर समाप्त होता है। यह वाक्य-रचना का प्रयोग-सम्बन्धी दोष है।
चरण 3: सुधार:
‘करता है’ में से ‘है’ हटाने पर वाक्य बनता है: वह कभी हानि-लाभ की चिन्ता नहीं करता।
निष्कर्ष:
शुद्ध रूप: वह कभी हानि-लाभ की चिन्ता नहीं करता। यहाँ ‘नहीं’ के बाद ‘है’ का प्रयोग नहीं होना चाहिए।