चरण 1: शब्द का मूल:
द्विज शब्द ‘द्वि’ (दो) और ‘ज’ (जन्म लेने वाला) से बना है। जिसका दो बार जन्म हो, वही द्विज कहलाता है। इसी आधार पर इसके कई अर्थ चलते हैं।
चरण 2: अर्थ और वाक्य-प्रयोग:
पहला अर्थ - दाँत: दाँत पहले दूध के रूप में और फिर स्थायी रूप में दो बार निकलते हैं। वाक्य: द्विज स्वस्थ हों तो मुख की शोभा बढ़ती है।
दूसरा अर्थ - ब्राह्मण: संस्कार से दूसरा जन्म पाने के कारण ब्राह्मण द्विज कहलाता है। वाक्य: द्विज को दान देना पुण्य माना जाता है।
निष्कर्ष:
द्विज के मुख्य अर्थ ब्राह्मण, पक्षी, दाँत और चन्द्रमा हैं। ऊपर दिए गए दो अर्थ दाँत और ब्राह्मण हैं।